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नेपाल में हिंदू राष्ट्र या लोकतंत्र क्या है भारत के लिए फायदेमंद? एक्सपर्ट ने बताया ऐसे रुकेंगे चीन के कदम

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काठमांडू

भारत के दोस्त और पड़ोसी नेपाल के लिए पिछले कुछ दशक उथल-पुथल भरे रहे हैं। अभी भी पूरी तरह से स्थिरता नहीं है। समय-समय पर यहां हिंदू राष्ट्र और राजशाही की मांग भी उठती रहती है। नेपाल में हिंदू राष्ट्र भारत के लिए अच्छा साबित हो सकता है। पूर्व राजनयिक सुखदेव मुनि ने द डिप्लोमैट के साथ बातचीत में अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि नेपाल में राजशाही की वापसी चीन को रोकने का अच्छा साधन हो सकता है। नेपाल में लगातार राजनीतिक अस्थिरता चीन को अपना प्रभाव बढ़ाने में मदद देती है।

एसडी मुनि से जब इस बारे में पूछा गया कि नेपाल कई बार चीन की ओर झुकता रहा है, फिर भी भारत में एक पक्ष उसका समर्थन क्यों करता है? इस पर उन्होंने कहा, ‘परंपरागत रूप से भारत नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र का समर्थन करता रहा है। लेकिन दुर्भाग्य से नेपाल की राजशाही कभी भी संवैधानिक नहीं रही। 1960 से ही यह निरंकुश रही है। यही कारण है कि यह संसदीय लोकतंत्र के साथ नहीं चल सकी।’ उन्होंने यह भी बताया कि भारत के साथ संतुलन बनाने के लिए नेपाल की राजशाही अमेरिका, पाकिस्तान और चीन का साथ लेती रही।

चीन का बढ़ रहा प्रभाव
मुनि ने आगे कहा, ‘पिछले दशक में भारतीय स्टैबलिशमेंट के कुछ वर्ग नेपाल में राजशाही की बहाली का समर्थन करते रहे हैं। क्योंकि नेपाल में अस्थिरता के साथ-साथ कम्युनिस्ट ताकतें मजबूत हैं जो भारतीय कूटनीति के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। इनसे निपटना हर दिन मुश्किल होता जा रहा है। राजतंत्र में शक्ति का केंद्र एक होगा, जबकि नेपाल के लोकतंत्र में कई शक्ति केंद्र हैं।’ उन्होंने आगे बताया कि चीन का पड़ोस में बढ़ता प्रभाव खतरा है और इससे निपटना भारत के लिए मुश्किल हो रहा है।

बीजेपी के साथ रहे राजशाही के अच्छे संबंध
यह माना जा रहा है कि पारंपरिक राजशाही और हिंदू राष्ट्र चीन के बढ़ते कदम को रोक सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल में राजशाही हमेशा भारत में बीजेपी शासन के साथ मित्रवत रही है। उन्होंने कहा, ‘1970-80 के दशक के दौरान नेपाल में राजपरिवार से संसदीय चुनावों में भारत के बीजेपी नेताओं को समर्थन मिलने के उदाहरण हैं। नेपाल के राजपरिवार का भारतीय शाही परिवारों के साथ वैवाहिक संबंध भी है, जिनमें से कुछ बीजेपी से जुड़े हैं।’

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