अंकारा:
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने सोमवार को कहा कि अगर 1974 में तुर्की की सेनाएं दक्षिण की ओर बढ़ी होतीं, तो साइप्रस पूरी तरह से तुर्की का होता । तुर्की के सैन्यकर्मियों के सम्मान में दिए गए डिनर में एर्दोगन ने साइप्रस पर तुर्की के आक्रमण का बचाव किया। उन्होंने साइप्रस पर तुर्की के इस बर्बर हमले को “शांति अभियान” बताया और कहा कि उस वक्त साइप्रस में रहने वाले टर्किश लोग नरसंहार के खतरे का सामना कर रहे थे। हालांकि, इतिहासकारों के अनुसार, तुर्की ने साइप्रस पर गलत आरोप लगाकर आक्रमण किया था। इसका असली मकसद साइप्रस के उत्तरी इलाके पर कब्जा करना था। तुर्की के हमले के कारण साइप्रस के 160000 लोगों को अपना घर बार छोड़कर शरण लेने के लिए दूसरे देशों में जाना पड़ा था।
एर्दोगन ने साइप्रस को लेकर क्या कहा
एर्दोगन ने कहा, “आधी सदी पहले, तुर्की साइप्रस नरसंहार के कगार से वापस आ गए थे। 1974 के शांति अभियान में देश के कोने-कोने से हमारे 498 सैनिक, अधिकारी, गैर-कमीशन अधिकारी और नागरिक शहीद हुए। तमाम दबावों के बावजूद, अगर यह तुर्की के हस्तक्षेप के लिए नहीं होता, तो न तो उत्तरी साइप्रस का तुर्की गणराज्य और न ही तुर्की साइप्रस आज मौजूद होता। एर्दोगन ने कहा, “वास्तव में, शायद अगर हमने दक्षिण की ओर कदम बढ़ाया होता, तो कोई दक्षिण और उत्तर नहीं होता और साइप्रस पूरी तरह से हमारा होता।” देश की स्थायित्व और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए काम करने वाले सैनिकों की सफलता की कामना करते हुए एर्दोगन ने जोर देकर कहा कि तुर्की के पास एक शक्तिशाली सेना होनी चाहिए।
भारत का दोस्त देश है साइप्रस
भारत और साइप्रस के बीच संबंध परंपरागत रूप से गमर्जोशी भरे और काफी मैत्रीपूर्ण रहे हैं। आर्चबिशप मकारोइस महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू के सबसे बड़े प्रशंसक थे। भारत ने ब्रिटिश उपनिवेश शासन के खिलाफ साइप्रस के संघर्ष में सहायता प्रदान की थी। मोदी सरकार के कार्यकाल में ये संबंध और ज्यादा मजबूत हुए हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से साइप्रस पर तुर्की के अवैध कब्जे का विरोध किया है। भारत ने इस कब्जे वाले क्षेत्र को साइप्रस का बताया है। भारत और साइप्रस अब रक्षा संबंधों को भी मजबूत कर रहे हैं। जल्द ही दोनों देशों में हथियारों की खरीद को लेकर बड़ा समझौता भी हो सकता है।
तुर्की के साइप्रस पर आक्रमण के 50 साल पूरे
इस साल तुर्की के साइप्रस पर आक्रमण किए 50 साल पूरे हो जाएंगे। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया है। जनवरी में कांग्रेसनल हेलेनिक कॉकस ने राष्ट्रपति बाइडन को एक पत्र भेजा, जिसमें उनसे यूएस-साइप्रस संबंधों को मजबूत करने के लिए सार्थक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया। पत्र में साइप्रस के कब्जे वाले इलाके को फिर से मिलाने को लेकर अमेरिकी समर्थन का जिक्र था।
