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गुरु का वृषभ राशि में गोचर और राजनीतिक गतिविधियों में तेज बदलाव

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अभी हाल में ही गोचर गुरु का वृषभ राशि के कृत्तिका नक्षत्र के दूसरे चरण में प्रवेश एक मई 2024 में हुआ है. बारह वर्षों की भ्रमण चक्र में गुरु हर राशि में लगभग एक साल के लिए प्रवेश करते हैं और मई 2025 में यह राशि परिवर्तन से मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे. आजाद भारत की कुंडली में वृषभ लग्न उदय में राहु विराजमान है इसलिए गोचर गुरु जब भी वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं तब राजनीतिक माहौल गर्म होता दिखाई देता है.

ज्ञात रहें कि गुरु का वृषभ राशि में प्रवेश अपनी अतिचारी गति से हो रहा है यानी वर्तमान में गुरु 0.234 डिग्री प्रतिदिन से राशि मंडल में आगे चल रहे है जोकि इनकी सामन्य गति से तीन गुनी हैं और नवमांश में नीच राशि में स्थित है अर्थात अपने फल पुर्णतः देने में समर्थ है. आइये देखते हैं कि पिछले कई वर्षों में गुरु के वृषभ राशि गोचर में देश में क्या कुछ देखा गया.

(1) सितंबर 1965 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान गुरु वृषभ राशि में चल रहे थे और 11 जनवरी 1965 को ताशकंद में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय परिस्थितियों में दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई.
(2) मार्च 1977 में इमर्जेंसी के बाद हुये चुनाव में इन्दिरा गांधी के हारने के बाद देश में पहली बार गैर कॉंग्रेस सरकार बनी, इस समय गुरु वृषभ राशि के कृत्तिका नक्षत्र में भ्रमण कर रहे थे.
(3) 1989 में अयोध्या राम जन्मभूमि आंदोलन और बोफोर्स कांड के चलते राजीव गांधी को चुनाव में हार और नैशनल फ्रंट के श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की प्रधान मंत्री पद से ताजपोशी
(4) 2001 में तहलका मैग्जीन की पत्रकारिता ने केंद्र सरकार के कई बड़े लोगों को रक्षा सौदों में चौकाने वाले खुलासे किये.
(5) 2013 में जब गुरु वृषभ में गोचर कर रहे थे उस समय मनमोहन सिंह की काँग्रेस सरकार को भ्रष्टाचार विरोधी देशव्यापी आंदोलन झेलना पड़ा और फिर 2014 मै बीजेपी 282 सीटों को जीत कर श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व मे केंद्र की सरकार बनाने में सफल हुईं.

वर्तमान में गुरु के वृषभ गोचर में अगर बीजेपी के स्थापना कुंडली 6 अप्रैल 1980 दिल्ली में 11 है 45 मिनट में यह गोचर हानि भाव में होगा, वर्तमान में चन्द्र में बुध का अंतरा चल रहा, चन्द्र नीच राशि में हैं पर मंगल और शुक्र की शुभ दृष्टि के चलते एक बार फिर बीजेपी केंद्र में सरकार बनाने में सफल तो होगी परंतु बुध का केतु से युति औऱ शनि मंगल की दृष्टि से कुटिल योग का निर्माण भी हों रहा है जो संकेत देता है कि सरकार बनाने में जोड़ तोड़ कि और विवादस्पद राजनीतिक दावपेंच मुकदमेबाज़ी और बड़े विवादों के तरफ ज्योतिषीय योग देखने को मिल सकते हैं. चुनाव के चलते केंद्र सरकार को कुछ न्यायपालिका के फैसले भी सरदर्द बनते दिख रहे हैं और निर्वाचन आयोग के कार्य को लेकर भी कोर्ट में चुनौती मिल सकती है.
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सुभाष सक्सेना
ज्योतिष आचार्य

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