—10 हजार में से अब तक 6 हजार से ज्यादा बट गए कूपन
— 25 मई को खत्म हो जाएगा कूपन वितरण का काम
भोपाल
बीएचईएल में उत्पादन में अहम भूमिका निभाने में मजदूर भी किसी नियमित कर्मचारी से कम दिखाई नहीं देते। वित्तीय वर्ष समाप्ति तक दिनरात मेहनत करने वाले कुछ मजदूरों को मिठाई का एक डिब्बा भी नहीं मिले यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है। हालांकि भेल प्रबंधन ने सभी नियमित कर्मचारी, ठेका श्रमिक, सीआईएसएफ और वर्कस कांट्रेक्टस को मिठाई वितरण की पूरी कोशिश की है, फिर भी कई मजदूर आईआर विभाग में मिठाई के लिए चक्कर लगा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक एक नामी कंपनी से बीएचईएल ने उत्पादन लक्ष्य पूरा होने की खुशी में 750 रुपए में मिठाई के पैकेट के आर्डर दिए थे। इनमें 460 और 290 के हिसाब से कूपन व पैकेट खरीदे गए थे। सूत्रों की मानें तो करीब 290 वाली मिठाई के 12 हजार पैकेट और 460 रुपए वाले कूपन करीब 10 हजार लिए थे। अकेले 460 वाले कूपन 46 लाख के बताए जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि आज भी करीब 4 हजार कूपन बचे हुए हैं। न तो कुछ मजदूरों को कूपन मिल पा रहे हैं न ही मिठाई।
इस बीच आईआर विभाग की मनमानी का आलम यह है कि उसने वर्कस कांट्रेक्टस के उन मजदूरों को जिन्होंने 31 मार्च 2024 को भेल कारखाने में काम नहीं किया है या डयूटी पर नहीं आए हैं उन्हें मिठाई का वितरण नहीं किया जाएगा। ऐसे आदेश से कई मजदूरों में हड़कंप मचा हुआ है। साफ जाहिर है कि सालभर दिनरात मेहनत करने वाले इन मजदूरों को ऐन वक्त पर झुनझुना पकड़ा दिया जाए तो असंतोष फैलना लाजमी है।
ऐसे में भेल के कार्यपालक निदेशक और महाप्रबंधक मानव संसाधन मजदूरों के हक में फैसला ले सकते हैं। इस संबंध में भेल प्रवक्ता का कहना है कि प्रबंधन ने सभी को मिठाई वितरण करने की कोशिश की है। यदि कुछ मजदूर इससे वंचित रह गए हैं तो प्रबंधन इस पर विचार करेगा।
इनका कहना है
यदि बीएचईएल प्रबंधन के पास अतिरिक्त कूपन हैं या मिठाई बची है तो मजदूरों को इसका लाभ मिलना चाहिए। मजदूरों की भूमिका भी उत्पादन में अहम रही है।
राम नारायण गिरी, अध्यक्ष, आल इंडिया भेल एम्प्लाइज यूनियन
क्या होगा शेष बचे कूपन का
सूत्रों की मानें तो मिठाई वितरण के अलावा राजधानी के एक मिठाई वाले ने करीब 10 हजार कूपन भेल प्रबंधन को दिए हैं। इस कूपन से भेल कर्मचारी, ठेका श्रमिक, वर्कस कॉन्ट्रेक्ट के कर्मचारी मिठाई की दुकान से पैकेट ले रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अभी सैकड़ों की तादाद में कूपन आईआर या एचआर विभाग के पास पड़े हुए हैं। जिसका उपयोग 25 मई तक ही किया जा सकेगा। इसके बाद यह कूपन मिठाई दुकान वाले के पास चले जाएंगे। इससे भेल को लाखों रुपए का चूना लगेगा, लेकिन इसकी फिक्र संबंधित विभाग को नहीं हैै। इसका लाभ—शुभ भी किससे जुड़ा है यह समझ से बाहर है। जानकारों का कहना है कि गरीब मजदूरों को यह कूपन वितरित कर दिए जाएं तो उनमें असंतोष खत्म हो सकता है।
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तीन साल से नहीं हुई आईआर की बैठक
भेल में करीब तीन साल से आईआर की बैठक ही नहीं हुई। 2019 से 21 तक कोरोना काल की अवधि छोड़ दी जाए तब भी एचआर विभाग—आईआर की मीटिंग करना जरूरी था। भेल कारखाने के उत्पादन से जुड़े मुद्दे और टाउनशिप के मामले में इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी के चलते इस बैठक को बुलाने की जरूरत ही नहीं समझी। पारदर्शिता एकदम खत्म सी हो गई। देर आएद दुरुस्त आएद की तर्ज पर भेल प्रबंधन को यह बैठक बुलाना चाहिए।
