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वोटर टर्नआउट में अंतर पर मचा बवाल, सफाई में चुनाव आयोग ने यूं समझाया वोट प्रतिशत बढ़ने का गणित

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नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव के वोटिंग के दिन मतदान की संख्या और उसके द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों में अंतर को लेकर हो रहे हंगामा मचा हुआ है। जिसको लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि मतदान में ‘परिवर्तन’ की कोई भी गणना मतदान के अगले दिन अद्यतन की गई संख्या और कुछ दिनों बाद जारी होने वाले अंतिम आंकड़ों के बीच के अंतर के आधार पर की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मतदान के अगले दिन अद्यतन की गई संख्या और अंतिम संख्या के बीच का अंतर केवल कुछ लाख का ही है। दरअसल कांग्रेस ने वोटिंग में 1.07 करोड़ की वृद्धि पर चिंता जताई है। उन्होंने मतदान के दिन चुनाव आयोग के ऐप पर दिखाए गए नंबरों और अंतिम मतदान डेटा के बीच अंतर की ओर इशारा किया है।

क्यों दिख रहा कुछ लाख का अंतर
कांग्रेस की चिंता पर चुनाव अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का हवाला देते हुए रिकॉर्ड पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि उन्होंने इसका उल्लेख किया कि मतदान के दिन के नंबरों को अगले दिन दिए गए नंबरों से अलग करके देखना गलत था। ऐसा इसलिए है क्योंकि मतदान के दिन दूरदराज के मतदान केंद्रों से मतदान विवरण आमतौर पर उपलब्ध नहीं होते हैं। अगले दिन तक सभी मतदान केंद्रों से वोटों का विवरण आ जाता है तो उसे अगले दिन अपलोड किया जाता है। जिसकी वजह से नंबर में कुछ अंतर दिखता है।

मतदान में कितने प्रतिशत का अंतर
मतदान के अद्यतन आंकड़ों के अनुसार चुनाव आयोग द्वारा जारी ‘अंतिम’ आंकड़ों की तुलना में पूर्ण और प्रतिशत में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं दिखा। उदाहरण के लिए पहले चरण के दौरान मतदान के दिन (19 अप्रैल) कुल मतदान प्रतिशत 63.5% रहा लेकिन जब अगले दिन कुल मतदान प्रतिशत आया तो वो बढ़कर अगले दिन 66.1% हो गया। हालांकि अंतिम मतदान प्रतिशत अपरिवर्तित रहा। ऐसा ही कुछ शुरुआती तीन चरणों में आए रुझान में दिखा। हालांकि, चौथे चरण में अंतिम मतदान प्रतिशत में मामूली वृद्धि हुई और यह पिछले आंकड़े 68.9% से बढ़कर 69.2% हो गया। इस चरण के दौरान अपडेट किए गए आंकड़ों में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई। सूत्रों के अनुसार, इसका कारण बाद में दिन में अधिक मतदान होना था, जिसके कारण कई केंद्रों पर मतदान की अवधि बढ़ानी पड़ी।

उच्च स्तर के संशोधन के दावों का खंडन करने के लिए चुनाव अधिकारियों ने 2019 के डेटा का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 2019 में सभी चरणों में, मतदान के दिन शाम की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी संख्या और चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम संख्या के बीच का अंतर 1.5% और 3.4% के बीच था। चुनाव आयोग के एक सूत्र ने बताया कि बूथों पर मतदान पूरा होने के बाद मतदान दल फॉर्म 17 सी के साथ संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के पास आते हैं। इस फॉर्म में वोटों की सटीक संख्या सटीक लिखी होती है। अधिकारी ने आगे कहा कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर कुल मतदान में किसी भी तरह के बदलाव या वृद्धि का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि विवरण फॉर्म 17सी में दर्ज किए जाते हैं और मतदान एजेंटों को इस फॉर्म की साइन की हुईं प्रतियां मिलती हैं।

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