कानपुर देहात
उत्तर प्रदेश का कानपुर देहात पिछले तीन दिनों से चाट-चाउमिन खाने को लेकर हिंसा से झुलस रहा है। रनियां थाना क्षेत्र के आर्यनगर में गुरुवार को राजेंद्रा चौराहे पर हिस्ट्रीशीटर ने चाऊमीन खाने के दौरान फत्तेपुर रोशनाई गांव के एक युवक को पीट दिया। इसका विरोध करने पर फत्तेपुर रोशनाई के कई लोग हिस्ट्रीशीटर के गांव आर्यनगर पहुंचे और मारपीट की। कुछ ही देर में आर्यनगर के लोग एकत्र होकर मारपीट करने लगे। कई राउंड फायरिंग की और बम फोड़े। दुकानों में तोड़फोड़ की। सीओ भारी पुलिस बल लेकर मौके पर पहुंची। घायलों को अस्पताल भेजा गया है। इस मामले में रामजी की संलिप्तता सामने आई है।
दावा किया जा रहा है कि आर्यनगर का रहने वाला रामजी (36) हिस्ट्रीशीटर है। उस पर चोरी, लूट, हत्या समेत कई अपराधिक मामले दर्ज हैं। बुधवार को फत्तेपुर रोशनाई के संजय सेंगर के बेटे अर्पित इसके भाई लकी को रामजी ने पीट दिया। गुरुवार को रामजी और कल्लू आदि ने अपने साथियों के साथ मिलकर रास्ते में पिता-पुत्र की फिर से पिटाई कर दी। इससे फत्तेपुर गांव के लोग आक्रोशित हो गए। आर्यनगर गांव जाकर मारपीट की। इसके बदले में आर्यनगर गांव के लोगों एकत्र हो गए। फत्तेपुर रोशनाई गांव के रास्ते से निकलने वाले हर व्यक्ति की पिटाई शुरू कर दी।
गुप्ता परिवार पर किया गया हमला
फत्तेपुर रोशनाई के रहने वाले गुप्ता परिवार पर हमला कर दिया। उनके मकान और दुकानों में तोड़फोड़ की गई। इस दौरान कई राउंड फायरिंग की गई। बम भी चलाए गए। इससे ग्रामीणों में दहशत व्याप्त हो गया। घटना की जानकारी पर सीओ अकबरपुर तनु उपाध्याय रनियां के साथ-साथ गजनेर, अकबरपुर आदि थानों का फोर्स लेकर मौके पर पहुंचीं। भीड़ को भगाया गया। हिस्ट्रीशीटर समेत अन्य घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। एएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि घटना की छानबीन की जा रही है। घायलों को अस्पताल भेजा गया है।
थानाध्यक्ष पर लगा गंभीर आरोप
फत्तेपुर रोशनाई गांव के लोगों का कहना है कि आर्यनगर के रहने वाले हिस्ट्रीशीटर पर पुलिस ने चुनाव के समय भी शिकंजा नहीं कसा। इससे उसके मन बढ़ गए थे। वह अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर अक्सर दबंगई करता है। बुधवार शाम चाऊमीन खाने के दौरान हुई घटना के बाद मामले में शिकायत हुई थी। इसके बाद भी रनियां थानाध्यक्ष ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। इसी के चलते गुरुवार को फिर दोनों पक्षों में संघर्ष हो गया और गोली बम चल गए। इसके बाद भी पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए। जब मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया तो स्थिति पर काबू पाया जा सका।
