माले:
चीन के गुलाम मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद अब मालदीव की प्यास बीजिंग बुझा रहा है। चीन ने मालदीव को 1500 टन पानी की ताजा खेप भेजी है, जिसे कब्जे वाले तिब्बत के ग्लेशियर से पहुंचाया गया है। पानी का ये शिपमेंट माले में चीनी राजदूत वांग लिक्सिन ने मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर को सौंपा। मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने इसकी जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा, ‘शीजांग स्वायत्तशासी क्षेत्र (तिब्बत का चीनी नाम) के लोगों से 1500 टन मिनरल वाटर मिलने के लिए आभारी हूं।’ इसके पहले चीन ने मार्च में 1500 टन पानी की खेप भेजी थी।
मालदीव के विदेश मंत्री ने बताया कि इस खेप से पानी की कमी से जूझ रहे द्वीप को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद करेगी। चीन की राजदूत वांग लिक्सिन ने जमीर के ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा, ‘शीजांग स्वायत्त क्षेत्र से दान किए गए 5100 मीटर ऊंचे ग्लेशियरों का प्रीमियम पानी पहाड़ों और समुद्र से होते हुए माले में पहुंचते हुए देखकर बहुत खुशी हुई है। ये चीन और मालदीव के लोगों की गहरी दोस्ती और तिब्बत के लोगों की महान उपलब्धि को दर्शाता है।’
जलसंकट में भारत ने दिया था साथ
आज चीन पानी भेजकर उसका ढिंढोरा पीट रहा है लेकिन मालदीव का दोस्त भारत हमेशा उसे पानी की सप्लाई करता रहा है लेकिन उसने कभी शोर नहीं मचाया। मालदीव के ज्यादातर द्वीप कोरल रीफ और रेत के टीलों से बने हैं। इसके चलते यहां मीठा पानी हासिल करना बेहद दुर्लभ हो जाता है। 2014 में मालदीव में भीषण जल संकट आया था, उस समय भारत ने ऑपरेशन नीर को अंजाम दिया था। इसके तहत भारतीय विमानों ने कई उड़ानें भरी थीं।
मालदीव सरकार के अनुरोध पर 12 घंटे के भीतर पहला विमान पानी की खेप लेकर पहुंचा था। इसके बाद दो भारतीय जहाज आईएनएस दीपक और आईएनएस शुकल्या भी माले पहुंचे थे, जिन पर 2000 टन पानी लदा हुआ था। इससे मालदीव को पेयजल संकट से निपटने में मदद मिली। पानी के अलावा भारत ने 2004 की सुनामी और कोरोना महामारी के दौर में भी मालदीव की तरफ आगे बढ़कर मदद की थी।
जब चीन ने भेजा मुइज्जू के महल के लिए पानी
इसके पहले चीन ने तिब्बत के ग्लेशियर से ही 1500 टन पानी मालेके लिए भेजा था, लेकिन ये पानी मालदीव के लोगों के लिए नहीं बल्कि राष्ट्रपति मुइज्जू के इस्तेमाल के लिए किया गया था। पानी की खेप पहुंचने के बाद कुछ दिनों तक जानकारी नहीं दी थी, लेकिन जब अफवाहें फैलने लगीं कि राष्ट्रपति भवन में इस्तेमाल के लिए एक महंगे ब्रांड के पानी की खेप मंगाई गई है। इसके बाद मालदीव के विदेश मंत्रालय ने बयान कर तिब्बत से पानी पहुंचने की जानकारी दी थी। हालांकि, मुइज्जू सरकार ने पानी के निजी इस्तेमाल के आरोपों को खारिज किया था।
