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मोरबी ब्रिज हादसे के बाद गुजरात में फिर बड़ी दुर्घटना… कौन लेगा सुरक्षा की गारंटी?

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अहमदाबाद:

गुजरात के राजकोट में भीषण अग्निकांड ने एक फिर लोगों की सुरक्षा की गारंटी पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। पिछले दिनों जब राज्य के वडोदरा में हरणी झील में नाव डूबने की घटना हुई थी तब राज्य सरकार की तरफ से तंत्र को सतर्क और सजग बनाने की आश्वासन दिया गया था, लेकिन राजकोट के टीआरपी मॉल के गेमिंग जोन में लगी आग ने एक फिर दावों की पोल खोल दी है। अब इस इस दुखद हादसे में 24 लोगों की मौत हुई है। इसमें 12 बच्चे शामिल हैं। सवाल यह है कि इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा? गुजरात के सूरत में जब तक्षशिला अग्निकांड हुआ तब यह माना गया था कि सरकार और जवाबदार चेत जाएंगे और मासूमों की मौत नहीं होगी।

डूबने के बाद अब अग्निकांड
राजकोट में भीषण अग्निकांड की यह घटना ऐसे वक्त पर सामने आई है जब राज्य में लगातार डूबने की घटनाएं सामने आ रही थी। राज्य में पिछले 15 दिनों 30 मौतें हुई हैं। तब सवाल यह है कि उचित सावधानी क्यों नहीं बरती गई? वहां पर आग बुझाने और पर्याप्त स्टॉफ की मौजूगी क्यों नहीं थी? सवाल यही है कि इस घटना के बाद भी तमाम बड़े दावे और वादे किए जाएंगे लेकिन जिन परिवारों ने गर्मियों की छुटि्टयों में अपने जिगर के टुकड़ों को खोया है। वे पूछ रहे है कि बच्चों की सुरक्षा की गांरटी कौन लेगा? इस घटन पीएम मोदी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शोक व्यक्त किया है। तो वहीं राज्य में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने दुख जताते पूछा है कि लोगों की जिंदगी की सुरक्षा कब सुनिश्चित होगी।

तक्षशिला की घटना से सबक नहीं
गुजरात के सूरत में 24 जून, 2019 को बड़ी अग्निकांड हुआ था। तब 22 छात्रों की मौत हो गई। पांच साल पूरे होने से पहले एक बार फिर राज्य में बड़े अग्निकांड ने तमाम दावों की पोल खोल दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सौराष्ट्र के सबसे बड़े गेम जोन में सुरक्षा के मानक पूरे नहीं थे। आग से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। यह भी सामने आया है कि गेम जोन के पास एनओसी भी नहीं थी।

कांग्रेस ने निगमों पर साधा निशाना
गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने इस हादसे पर दुख जताते हुए कहा है कि मनुष्य की मृत्यु से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। दुख की बात है कि ऐसी लगातार घटनाओं के बाद भी सरकार के पेट का पानी नहीं हिलता है। सूरत, वडोदरा, मोरबी, पालनपुर पुल त्रासदी सरकारी लापरवाही दिखाती है।अग्नि सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद लापरवाही बरती जा रही है। सरकार नियमित किश्तें वसूलने का काम करती है। जब गुजरातियों ने बीजेपी को वोट दिया है तो उनकी जिम्मेदारी दोगुनी हो जाती है। गोहिल ने आरोप लगाया है कि केंद्र में सरकार होने के बावजूद भी निगम की ओर से सिर्फ पैसे की उगाही की जाती है।

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