हेल्सिंकी
दूसरे विश्वयुद्ध से जुड़े एक रहस्य का खुलासा अब हो गया है। दूसरे विश्वयुद्ध में फिनलैंड का एक विमान बाल्टिक सागर के ऊपर सोवियत बमवर्षकों की ओर से मार गिराया गया था। इससे जुड़ा रहस्य 80 वर्षों के बाद सुलझता हुआ दिख रहा है। जून 1940 में विमान अमेरिकी और फ्रांसीसी राजनयिक कूरियर ले जा रहा था। तब सोवियत संघ की ओर से बाल्टिक देशों पर कब्जा करने से कुछ ही दिन पहले इसे मार गिराया गया था। विमान में सवार सभी नौ लोग मारे गए, जिनमें फिनिश चालक दल के दो सदस्य और सात यात्री शामिल थे।
एक अमेरिकी राजनयिक, दो फ्रेंच, दो जर्मन, एक स्वीडिश और एक एस्टोनियाई फिनिश नागरिक इसमें मारे गए। एस्टोनिया में एक गोताखोरी और बचाव दल ने इस सप्ताह कहा कि उन्हें फिनिश एयरलाइन एयरो, जो अब फिनएयर कहलाता है कि ओर से संचालित जंकर्स जू 52 विमान के अच्छी तरह से संरक्षित हिस्से और मलबा मिला है। यह एस्टोनिया की राजधानी तेलिन के पास एक छोटे द्वीप के करीब 70 मीटर की गहराई में पाया गया है।
विमान पर कब हुआ था हमला
एस्टोनियाई गोताखोरी और अंडरवाटर सर्वे कंपनी टुक्रिटूड ओयू के प्रवक्ता कैडो पेरेमीज ने विमान के अवशेषों को खोजने में समूह की सफलता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हमने शून्य से शुरुआत की और खोज के लिए बिल्कुल अलग दृष्टिकोण अपनाया। एस्टोनिया से फिनलैंड के रास्ते में कालेवा नाम के नागरिक विमान को मार गिराने की घटना 14 जून 1940 को हुई। इससे तीन महीने पहले फिनलैंड और मॉस्को के बीच एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।
फिनलैंड ने साधी चुप्पी
विमान पर हमले की खबर से फिनलैंड के अधिकारियों में अविश्वास और गुस्सा देखने को मिला। उन्हें बताया गया कि विमान को उलेमिस्टे हवाई अड्डे से उड़ान भरने के 10 मिनट बाद दो सोवियत डीबी-3 बमवर्षकों ने मार गिराया था। 1980 के दशक से कालेवा के मामले की जांच करने वाले फिनिश विमानन इतिहासकार कार्ल-फ्रेड्रिक गेस्ट ने कहा कि यह हैरानी बाली बात थी कि एक सामान्य निर्धारित उड़ान को शांतिकाल के दौरान मार गिराया गया। फिनलैंड ने आधिकारित तौर पर विमान पर हमले की डिडेल को लेकर वर्षों तक चुप्पी साधे रखी। क्योंकि वह सोवियत को नाराज नहीं करना चाहता था।
