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Monday, April 27, 2026
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क्यों जाना है अंदर… सांसद अब्दुल्ला की संसद में एंट्री को लेकर CISF जवानों ने टोका, भड़के विपक्षी दल

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नई दिल्ली

राज्यसभा के सदस्य एम एम अब्दुल्ला ने संसद के उच्च सदन के सभापति जगदीप धनखड़ से कुछ सुरक्षाकर्मियों द्वारा कथित तौर पर उनकी संसद यात्रा का उद्देश्य पूछे जाने की शिकायत की है। सभापति को लिखे पत्र में कहा गया है कि मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) कर्मियों ने उन्हें उस समय रोका जब वह संसद भवन परिसर में प्रवेश कर रहे थे। DMK सांसद अब्दुल्ला उस समय सांसदों की, परिसर के भीतर आवाजाही के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक बैटरी संचालित गाड़ी में थे। पत्र की प्रति संसदीय कार्यमंत्री किरेन रीजीजू और राज्यसभा के महासचिव को भी भेजी गई है।

संसद के अंदर क्यों जाना चाहते हैं पूछा गया
अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें एक सुरक्षा घेरे से पहले रोका गया और उनसे उनकी यात्रा का उद्देश्य पूछा गया। यह भी पूछा गया कि वह परिसर के अंदर कहां जा रहे हैं। उन्होंने कहा मैं सीआईएसएफ कर्मियों के इस व्यवहार से स्तब्ध हूं जिन्होंने संसद में मेरे आने के उद्देश्य पर मुझसे सवाल किया। यह एक ऐसी जगह है जहां मैं लोगों और तमिलनाडु राज्य के हितों का प्रतिनिधित्व करता हूं। पीएसएस (पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस) के अधीन ऐसा अभूतपूर्व दुर्व्यवहार पहले कभी नहीं हुआ।

शशि थरूर ने आपत्ति जताई, टीएमसी भी साथ
अब्दुल्ला ने कहा कि सभापति को सीआईएसएफ कर्मियों द्वारा किए गए अभूतपूर्व दुर्व्यवहार का संज्ञान लेना चाहिए, उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए और राज्यसभा एवं उसके सदस्यों की गरिमा को बनाए रखना चाहिए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अब्दुल्ला के साथ हुए इस कथित दुर्व्यव्यहार पर आपत्ति जताई। थरूर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के हाथों में संसद की सुरक्षा की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य साकेत गोखले ने भी अब्दुल्ला का समर्थन करते हुए कहा कि संसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की निजी संपत्ति नहीं है।

गोखले ने कहा-संसद शाह की निजी संपत्ति नहीं
गोखले ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा एक सांसद से यह नहीं पूछा जा सकता कि वे संसद क्यों जा रहे हैं। सदन के सदस्य के रूप में, संसद में रहना हमारा अधिकार है। उन्होंने कहा, क्या इसीलिए पीएसएस की जगह सीआईएसएफ को संसद की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है? भारतीय सांसदों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के लिए? गृह मंत्री अमित शाह को समझ लेना चाहिए। अब न तो ‘400 पार’ है और न ही ‘300 पार’। संसद मोदी या शाह की निजी संपत्ति नहीं है कि वे सांसदों को रोक सकें और पूछताछ कर सकें।

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