वॉशिंगटन:
अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को दुनिया का सबसे भयानक आतंकी हमला हुआ था। इस हमले ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। इस दिन हाईजैक किए गए विमान से वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ। अमेरिकी रक्षा विभाग के ऑफिस पेंटागन पर हवाई हमला हुआ और पेंसिल्वेनिया में विमान मैदान में क्रैश हो गया। 3000 लोग आतंकी हमले में मारे गए। 20 साल से अमेरिका की स्थिति रही है कि आतंकी समूह अल कायदा ने अकेले हमले को अंजाम दिया। लेकिन अब अमेरिका ने एक नया वीडियो जारी किया है। इस वीडियो के जरिए अमेरिका में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सऊदी अरब की ओर से हाईजैकर्स को सहायता दी गई थी?
चार प्लेन हाईजैक करने वालों में ज्यादातर सऊदी के नागरिक थे। अमेरिका ने इससे जुड़ा एक वीडियो अब पब्लिक के लिए जारी किया है। वीडियो 9/11 हमले के 2 साल पहले साल 1999 की गर्मियों का है। इससे तीन महीने पहले अल कायदा ने हमला करने का फैसला किया था। वीडियो में एक शख्स दिख रहा है, जिसका नाम उमर अल-बयूमी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका की संघीय जांच ब्यूरो (FBI) ने इसे सऊदी खुफिया सर्विस का एक ऑपरेटिव बताया है, जिसका 9/11 के दो हाईजैकर्स से करीबी संबंध है।
क्या है वीडियो में?
9/11 हमले की शुरुआती जांच का नेतृत्व करने वाले सेवानिवृत्त एफबीआई एजेंट रिचर्ड लैंबर्ट ने कहा, ‘यह सबूतों की विशाल दीवार में एक और बड़ी ईंट है जो इस बिंदु की ओर इशारा करती है कि सऊदी सरकार 9/11 के हमलों में शामिल थी।’ वीडियो में कई दिनों तक बयूमी को फुटेज फिल्माते हुए दिखाया गया है। बयूमी ने इस दौरान सुरक्षा चौकियों और इमारत के एक मॉडल के साथ अमेरिकी कैपिटल के प्रवेश और निकास द्वार को दिखाया है। एक जगह उसने वॉशिंगटन स्मारक की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह वहां जाएगा और विस्तार से बताएगा कि वहां क्या है।
कहां से मिला वीडियो
सीबीएस न्यूज के मुताबिक लैंबर्ट ने कहा कि वॉशिंगटन स्मारक दूर से दिखता है। यह आतंकियों को उनके टार्गेट तक पहुंचने में मदद कर सकता है। लैंबर्ट 9/11 पीड़ितों के परिवारों की ओर से सऊदी अरब को हमले के लिए जिम्मेदार ठहराने के मामले में सलाहकार हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आतंकियों का तीसरा टार्गेट कैपिटल था। यह वीडियो ब्रिटिश पुलिस को तब मिला था जब उन्होंने हमले के कुछ दिनों बाद ब्रिटेन में बयूमी के अपार्टमेंट पर छापा मारा था। बयूमी ने जब यह वीडियो बनाया तो वह अक्सर दो सऊदी राजनयिकों के साथ था, जिनके बारे में कहा जाता है कि उनके अल कायदा से संबंध थे। हालांकि सऊदी ऐसा नहीं मानता।
क्यों जारी किया गया वीडियो
माना जाता है कि ब्रिटिश पुलिस ने 9/11 के तुरंत बाद वीडियो एफबीआई को सौंप दिया था। लेकिन अब सवाल उठता है कि आखिर दो दशक के बाद यह फुटेज क्यों जारी किया गया है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सऊदी पर दबाव बनाने का तरीका है। क्योंकि सऊदी और अमेरिका के संबंधों में तनाव देखा गया है। सऊदी अरब ने दूसरी मुद्राओं में तेल बेचने की बात कही है, जो डॉलर का महत्व कम करेगा। इसके अलावा सऊदी ब्रिक्स जॉइन कर सकता है, जिसे वॉशिंगटन एक अमेरिका विरोधी ग्रुप के तौर पर देखता है।
