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वाह मांझी जी वाह! नीतीश जी को एकदम से टेंशन फ्री कर दिए, बेकार में ही बिहार में दो हफ्ते से मचा है हो-हल्ला?

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पटना

पहले विधायक, फिर मंत्री, फिर मुख्यमंत्री, फिर सांसद और अब केंद्रीय मंत्री। ये जीतन राम मांझी का परिचय है, जो पिछले 44 साल की राजनीतिक जीवन में उन्होंने हासिल किया है। सात-सात मुख्यमंत्रियों के साथ मंत्रिमंडल में काम करना मामूली बात थोड़े न है? राजनेताओं की किस्मत इतना साथ कहां देती है? मगर, मांझी जी स्पेशल हैं। बिहार में उनका बेटा मंत्री बनकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सपना साकार कर रहा है तो खुद दिल्ली में मंत्री बनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र की ख्वाहिश को पूरा कर रहे हैं। बिहार में बीजेपी कार्यकर्ता मांझी जी की जय-जयकार कर रहे हैं। इसी जयकारी का मान बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पटना पधारे। आदत के मुताबिक पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने पूछ लिया कि बिहार में बहुत से पुल गिर गए हैं, उसके बारे में आप क्या कहेंगे? फिर तो मांझी ने जो जवाब दिया, वो सीधे-सीधे किसी के लिए आइडिया हो सकता है।

बिहार में गिरते पुल पर सबकी अपनी-अपनी समझ
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार में पुलों की जल-समाधि पर बयान दिया। बिहार में पिछले कुछ हफ्तों में पुल ढहने की घटनाओं से सियासी भूचाल आया हुआ है। सरकार को जवाब नहीं सूझ रहा। एक पुल का इतिहास-भूगोल निकाला ही जाता है कि दूसरा पुल धड़ाम हो जा रहा है। एसी की ठंडी में फाइलों की तलाश करने में अफसर तर-बतर हो जा रहे। मगर, जीतन राम मांझी ने पुल गिरने की असली कारणों के बारे में बताया।

बारिश की वजह से बिहार में गिर रहे पुल- जीतन राम मांझी
बिहार में गिर रहे पुलों के बारे में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि ‘समाचार मिली है, हमलोग जानते हैं, बरसात का समय है। एबनॉर्मल (अप्रत्याशित) बरसात हुई है। इसलिए पुल के गिरने का सिलसिला है। इसके बावजूद भी, पुल क्यों गिरा है इसकी जांच यहां (बिहार) के मुख्यमंत्री (नीतीश कुमार) बहुत संवेदनशील है। उन्होंने बैठक की है और सख्त निर्देश दिया है कि अगर इसमें कहीं किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उस पर आवश्यक कार्रवाई किया जाए। कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।’ वैसे, बिहार में इतनी भी बारिश नहीं हुई है कि पानी के प्रेशर को कोई पुल न बर्दाश्त कर सके।

18 जून से अब तक बिहार में लगातार गिर रहे पुल
18 जून से अब तक बिहार के किशनगंज, अररिया, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, सीवान और सारण जिलों में दस पुल ढह चुके हैं, जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो सप्ताह के भीतर बिहार में सभी निर्माणाधीन और पुराने पुलों की निरीक्षण रिपोर्ट मांगी है। दरअसल, पुल ढहने से बिहार में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। सत्तारूढ़ नीतीश कुमार सरकार विपक्ष के साथ आरोप-प्रत्यारोप लगा रही है कि इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए? भवन निर्माण मंत्री अशोक कुमार चौधरी ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव पर आरोप लगाया कि जब वे राज्य के सड़क निर्माण और भवन निर्माण मंत्री थे, तब उन्होंने पुल रखरखाव के लिए अच्छी नीति नहीं बनाई, जबकि तेजस्वी ने कहा कि ये ‘केतली को काला कहने’ जैसा मामला है।

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