नई दिल्ली:
सोमवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 2,223 अंक लुढ़क गया। निफ्टी 24,056 पर आ गया। दुनियाभर के बाजारों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। इस गिरावट के बीच दिग्गज अमेरिकी निवेशक जिम रॉजर्स ने बड़ी चेतावनी दी है। रॉजर्स ने कहा है कि उनके पास बहुत सारा कैश है क्योंकि आने वाली बाजार गिरावट उनके जीवन की सबसे भयानक होगी।
रॉजर्स ने ईटी नाउ को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘अमेरिका के साथ दुनिया में परेशानी आने वाली है। मेरे पास बहुत सारा कैश इसलिए है क्योंकि मुझे आशंका है कि अगली बिकवाली मेरे जीवनकाल में सबसे खराब होगी। कारण है कि कर्ज हर जगह बहुत बढ़ गया है। यहां तक कि भारत पर भी अब कर्ज है। इसलिए आपको चिंतित होना चाहिए। मैं चिंतित हूं। मैं इस गिरावट के आने का इंतजार कर रहा हूं क्योंकि मुझे पता है कि यह बहुत-बहुत बुरी होने वाली है। हो सकता है कि यह यहां हो। मुझे नहीं पता।’
क्या निवेशकों को कैश बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए?
जब उनसे पूछा गया कि क्या निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में नकदी बढ़ाने पर विचार करना चाहिए तो उन्होंने कहा कि वह और नकदी रखना चाहेंगे। उन्होंने कहा, ‘चीजें हर जगह इतने लंबे समय से इतनी अच्छी रही हैं। इतिहास में हमेशा से जब हर कोई बहुत पैसा कमा रहा होता है तो यह चिंता का समय होता है। इसलिए मैं चिंतित हूं।’ उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह कुछ खरीदना चाहते हैं तो वह चांदी खरीदेंगे।
पिछले हफ्ते ही खबर आई थी कि बर्कशायर हैथवे के वॉरेन बफे की नकद हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 277 अरब डॉलर हो गई। कारण है कि उन्होंने Apple में अपनी आधी हिस्सेदारी बेच दी थी। 30 जून तक नकद हिस्सेदारी बढ़कर 276.9 अरब डॉलर हो गई, जो तीन महीने पहले 189 अरब डॉलर थी। बर्कशायर ने तिमाही में शेयरों की कुल 75.5 अरब डॉलर की बिक्री की। यह लगातार सातवीं तिमाही थी जब बर्कशायर ने जितने शेयर खरीदे उससे ज्यादा बेचे।
वैश्विक बाजारों में गिरावट की वजह क्या?
वैश्विक स्तर पर अमेरिका में मंदी की आशंका और येन के मजबूत होने से बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है। इस गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ेगा। एस क्यूब कैपिटल के सह-संस्थापक और सीआईओ हेमंत मिश्रा का कहना है, ‘निराशाजनक रोजगार आंकड़ों और येन के तेजी से बढ़ने के बाद अमेरिका में मंदी की आशंकाओं से वैश्विक बाजार सतर्क हो गया। मिडिल ईस्ट की दिक्कतें आग में घी का काम कर सकती हैं। इसका ईएम सहित सभी जोखिम वाली संपत्तियों पर असर पड़ने के आसार हैं। बशर्ते केंद्रीय बैंक हस्तक्षेप नहीं करें। वैसे तो भारतीय बाजार मजबूत हैं, लेकिन अछूते नहीं रहेंगे। निवेशक अपने नुकसान की भरपाई के लिए मुनाफे की तलाश में रहेंगे।’
