नई दिल्ली,
अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग एक बार फिर सुर्खियों में है. हिंडनबर्ग रिसर्च ने दावा किया है कि व्हिसलब्लोअर दस्तावेजों से पता चला है कि SEBI चेयरमैन की अडानी मनी साइफनिंग घोटाले में इस्तेमाल की गई अस्पष्ट ऑफशोर संस्थाओं में हिस्सेदारी थी.हिंडनबर्ग रिसर्च ने शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट किया था. इसमें एक भारतीय कंपनी से जुड़े एक और बड़े खुलासे का संकेत दिया गया था. अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म ने पोस्ट में लिखा था, “भारत में जल्द ही कुछ बड़ा होने वाला है”.
हिंडनबर्ग के दावे के तुरंत बाद विपक्ष हमलावर हो गया है. शिवसेना (UBT) प्रियंका चतुर्वेदी ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ‘हमें अब पता चला कि आखिर हमारी चिट्ठियों पर कोई जवाब क्यों नहीं दिया गया और वह संज्ञान में क्यों नहीं ली गईं. हमाम में सब नंगे हैं.’वहीं, TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी X पर पोस्ट कर हमला बोला है.
शनिवार शाम को हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक और पोस्ट करते हुए अपनी वेबसाइट पर इस खुलासे दावा करते हुए इससे संबंधित रिपोर्ट शेयर की. हिंडनबर्ग ने इस रिपोर्ट में अडानी ग्रुप और SEBI चीफ के बीच लिंक होने का दावा किया गया है. हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया है कि व्हिसलब्लोअर से मिले दस्तावेजों से पता चलता है जिन ऑफशोर संस्थाओं का इस्तमाल अडानी मनी साइफनिंग स्कैंडल में हुआ, उसमें SEBI अध्यक्ष माधबी पुरी बुच की हिस्सेदारी थी.
रिपोर्ट में हिंडनबर्ग रिसर्च ने लिखा है, “व्हिसलब्लोअर दस्तावेजों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में दावा किया गया है कि माधबी बुच और उनके पति धवल बुच ने 5 जून, 2015 को सिंगापुर में आईपीई प्लस फंड 1 के साथ अपना खाता खोला। आईआईएफएल के एक प्रिंसिपल द्वारा हस्ताक्षरित फंड की घोषणा में कहा गया है कि निवेश का स्रोत सैलरी है और दंपति की कुल निवेश 10 मिलियन डॉलर आंका गया है.”रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी X पर तंज किया है.
