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Friday, May 1, 2026
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‘…तो मीडिया हाउस पर लगेगा ताला’, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की प्रेस को चेतावनी

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ढाका ,

बांग्लादेश में उथल-पुथल के बीच अंतरिम सरकार ने स्थानीय मीडिया को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर वे गलत या भ्रामक खबरें प्रकाशित या प्रसारित करते हैं, तो उन्हें बंद कर दिया जाएगा. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने मीडिया समूहों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ने यह कदम गलत सूचना के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से उठाया है. अंतरिम सरकार के गृह मामलों के सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल (सेवानिवृत्त) एम सखावत हुसैन ने राजारबाग सेंट्रल पुलिस अस्पताल में घायल पुलिसकर्मियों से मुलाकात के दौरान कहा कि जब मीडिया सच्चाई को सामने नहीं लाता है तो राष्ट्र लड़खड़ा जाता है.

ढाका ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मीडिया ने भ्रामक खबरें प्रकाशित या प्रसारित कीं तो उन पर ताला डाल दिया जाएगा. मीडिया द्वारा सच्चाई सामने न लाने की आलोचना करते हुए हुसैन ने कहा कि जब मीडिया ईमानदारी से रिपोर्ट करने में विफल रहता है तो देश बिगड़ जाता है. उन्होंने तर्क दिया कि अगर मीडिया ने घटनाओं की सही रिपोर्टिंग की होती तो पुलिस से जुड़ी मौजूदा स्थिति से बचा जा सकता था.

हुसैन ने कहा कि मीडिया अक्सर सच्चाई को नज़रअंदाज़ कर देता है. टॉक शो में ठोस चर्चा की कमी होती है और मीडिया सटीक जानकारी देने में विफल रहता है. इस बीच डाक, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार नाहिद इस्लाम ने कहा कि हाल ही में छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट बंद करने में शामिल अधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

नाहिद ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट बंद करने के लिए ज़िम्मेदार लोगों को परिणाम भुगतने होंगे. उन्होंने कहा कि इंटरनेट तक पहुंच एक अधिकार है और इसे बाधित करना या बंद करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है. नाहिद ने जोर देकर कहा कि अंधाधुंध इंटरनेट शटडाउन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

शेख हसीना सरकार के खिलाफ़ हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान बांग्लादेश में कई बार इंटरनेट बंद हुआ था. नाहिद ने कहा कि सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्रभाग युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए युवाओं की भागीदारी को शामिल करने की योजना बना रहा है.

नवनियुक्त पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) मोहम्मद मैनुल इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हुई झड़पों में कम से कम 42 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. इस आंदोलन के कारण शेख हसीना सरकार गिर गई. डेली स्टार अखबार ने उनके हवाले से बताया कि 500 ​​से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और उन्हें अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. इस्लाम ने बताया कि दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों का अभी भी इलाज चल रहा है

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