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हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट पर मचा सियासी बवाल, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने घेरा तो क्या बोली BJP

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नई दिल्ली:

संसद का मॉनसून सत्र खत्म होने के साथ ही देश की सियासत में एक बड़ा भूचाल आ गया है। दरअसल अडानी प्रकरण में हिंडनबर्ग की एक और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में सेबी की चेयरमैन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट में किए गए खुलासे ने एक बार फिर बीजेपी और पूरे विपक्ष को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) समेत अन्य विपक्षी दल बीजेपी पर हमलावर हैं। बीजेपी भी इस मुद्दे पर खुलकर विरोधियों को जवाब दे रही है।

खरगे ने जेपीसी की मांग की
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस ‘बड़े घोटाले’ की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की जरूरत है। खरगे ने आरोप लगाया कि जब तक जेपीसी इस मुद्दे की जांच नहीं करती, तब तक यह चिंता बनी रहेगी कि ‘पिछले 7 दशकों में कड़ी मेहनत कर बनाई गईं भारत की संवैधानिक संस्थाओं से समझौता करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने सहयोगी को बचाते रहेंगे।’ कांग्रेस ने कहा कि सरकार को अडानी समूह की नियामक की जांच में सभी हितों के टकराव को खत्म करने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की अपनी मांग दोहराई। खरगे ने ‘एक्स’ पर लिखा,‘जनवरी 2023 की हिंडनबर्ग रिपोर्ट के खुलासे के बाद सेबी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोगी अडानी को सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी थी। हालांकि, सेबी प्रमुख से जुड़े एक लेन-देन के बारे में नए आरोप सामने आए हैं।’

हिंडनबर्ग के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले: AAP
आम आदमी पार्टी (आप) ने रविवार को कहा कि कि अमेरिकी शोध एवं निवेश फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की ओर से सेबी प्रमुख माधवी पुरी बुच के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए। हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया है कि सेबी की अध्यक्ष बुच और उनके पति के पास कथित अडानी धन हेराफेरी घोटाले में इस्तेमाल किए गए अस्पष्ट विदेशी फंड में हिस्सेदारी थी। सिंह ने कहा कि सेबी ने सुप्रीम कोर्ट के एक पैनल से कहा था कि अडानी समूह के संबंध में जांच ‘दिशाहीन’ है। उन्होंने कहा, ‘सेबी प्रमुख और उनके पति का पैसा मुखौटा कंपनियों में निवेश किया गया था। ये तथ्य सुप्रीम कोर्ट से क्यों छिपाए गए? सुप्रीम कोर्ट को नए घटनाक्रम पर ध्यान देना चाहिए और देखना चाहिए कि किस तरह तथ्यों को छिपाया गया।’

विपक्षी दल हिंडनबर्ग के आरोपों के साथ सुर मिला रहे: बीजेपी
बीजेपी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर भारत में वित्तीय अस्थिरता और अराजकता पैदा करने की साजिश का हिस्सा होने का आरोप लगाया। हिंडनबर्ग ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि माधवी बुच और उनके पति की उस ऑफशोर फंड में हिस्सेदारी थी, जिसका इस्तेमाल अडानीसमूह में धन की हेराफेरी के लिए किया गया। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पिछले साल अडानी समूह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाने वाली शॉर्ट सेलिंग कंपनी (हिंडनबर्ग) भारतीय जांच एजेंसियों की जांच का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल भी हिंडनबर्ग के आरोपों के साथ सुर मिला रहे हैं और साजिश अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है कि वे अराजकता और अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं, खासकर वित्तीय क्षेत्र में।

‘कांग्रेस शैली की मासूमियत और झूठ एक साथ’
बीजेपी नेता राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि शॉर्ट सेलिंग कंपनी ने कांग्रेस के साथ ‘स्पष्ट साझेदारी’ में बाजार नियामक सेबी पर हमला किया है और इसका एक मकसद और लक्ष्य है। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह दुनिया की सबसे मजबूत वित्तीय प्रणालियों में से एक को अस्थिर और बदनाम करने और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में अराजकता पैदा करने के लिए है। चंद्रशेखर ने कहा कि उन्होंने रिपोर्ट पढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि इसमें ‘कांग्रेस शैली की मासूमियत और झूठ एक साथ’ झलकता है और इसका उद्देश्य नियामक को बदनाम करना और बाजारों में अराजकता और नुकसान पैदा करना है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘मैं बार-बार कहता हूं कि कांग्रेस के परिवारवादियों की मदद से कई वैश्विक ताकतें भारत की प्रगति को धीमा करना चाहती हैं। हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे।’

सेबी चीफ ने क्या कहा?
वहीं, सेबी प्रमुख और उनके पति ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर हिंडनबर्ग के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा, ‘रिपोर्ट में लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद हैं। इनमें तनिक भी सच्चाई नहीं है। हमारा जीवन और वित्तीय स्थिति एक खुली किताब की तरह है।’

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