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हिंदुओं की रक्षा करो… बांग्लादेश में हिंदू समुदायों पर बढ़ी हिंसा, भारत की मशहूर हस्तियों ने लिखा ओपन लेटर

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नई दिल्ली

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर भारतीय काफी चिंतित हैं। इसी बीच भारत के कुछ नामचीन हस्तियों ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के लिए भारतीय संसद से अपील की है और हिंदुओं की रक्षा करने की मांग की है। इन नामचीन हस्तियों ने ओपन लेटर में पड़ोसी मुल्क में हिंदुओं पर हो रही हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

भारत की नामचीन हस्तियों ने लिखा ओपन लेटर
उन्होंने पत्र में हाल ही के दिनों में मेहरपुर में इस्कॉन सेंटर और देश के अन्य इलाकों में मंदिरों को जलाने और नुकसान पहुंचाने का जिक्र किया है। इसके साथ ही पत्र में बताया कि वहीं पर दंगाई हिंदुओं को मारने-पीटने के बाद जश्न मना रहे हैं। जो काफी पीड़ादायक है। बांग्लादेश में काफी लंबे वक्त से हिंदू समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा चल रही है। साल 2013 से अब तक वहां पर 36 हजार से अधिक हिंदुओं पर हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक वहां की सेना ने हिंदुओं को आश्वासन दिया कि वो हर कीमत पर उनकी रक्षा करेंगी लेकिन हिंदुओं की रक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। इस पत्र लिखने वालों में लेखक अमिश त्रिपाठी, लेखक आनंद रंगनाथन और जानेमाने वकील जे साई दीपक जैसे मशहूर लोग शामिल हैं।

सड़कों पर हिंदू समूह
बांग्लादेश में हर पल बदल रहे हालात के बीच अल्पसंख्यक समूह सड़क पर आ गए हैं और अपने अधिकारों के लिए अल्पसंख्यक संरक्षण कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। इन अल्पसंख्य समूहों में हिंदू समुदाय के लोग भी शामिल हैं। हिंदू छात्र समूह ने सरकार से 8 मांगों की सूची भी तैयार की है।

ये हैं वो 8 मांग

  1. अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए एक ‘फास्ट-ट्रैक ट्रिब्यूनल’ की स्थापना और दोषियों को तुरंत सजा, पीड़ितों को उचित मुआवजा और पुनर्वास प्रदान करना।
  2. ‘अल्पसंख्यक संरक्षण कानून’ को तुरंत लागू करना।
  3. अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय की स्थापना करना।
  4. ‘हिन्दू कल्याण ट्रस्ट’ को सरकार के प्रभाव और किसी भी तरह के हस्तक्षेप से मुक्त किया जाए और एक स्वतंत्र ट्रस्ट बनाया जाए।
  5. वक्फ संपत्ति की वसूली और संरक्षण के लिए कानून बनाना और ‘वैस्टेड प्रॉपर्टी रिटर्न एक्ट’ का उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
  6. सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों और विश्वविद्यालय कॉलेजों में अल्पसंख्यकों के लिए पूजा स्थल का निर्माण करना और प्रत्येक छात्रावास में प्रार्थना कक्ष आवंटित करना।
  7. संस्कृत और पाली शिक्षा बोर्ड का आधुनिकीकरण करना।
  8. शारदीय दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान 5 दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित करना। इसके साथ ही, प्रत्येक अल्पसंख्यक समुदाय के प्रमुख धार्मिक त्योहारों के लिए आवश्यक छुट्टी दी जा सकती है।

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