नई दिल्ली
ISRO ने अपना नया रॉकेट ‘एसएसएलवी’ लॉन्च किया है। यह रॉकेट छोटे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने के लिए बनाया गया है और व्यापार के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। ‘एसएसएलवी’ की प्रतिस्पर्धा स्काईरूट के ‘विक्रम’ और अग्निकुल कॉसमॉस के ‘अग्निबाण’ रॉकेट से होगी। भारत में सैटेलाइट लॉन्च का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। 2022 में यह बाजार 72 करोड़ अमेरिकी डॉलर का था और 2033 तक इसके 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। छोटे उपग्रह कई कामों के लिए उपयोगी हैं जैसे इंटरनेट और पृथ्वी अवलोकन।
भारतीय अंतरिक्ष संघ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल ए. के. भट्ट (सेवानिवृत्त) ने बताया, ‘बड़े प्रक्षेपण यान मौजूद हैं, लेकिन बड़ी संख्या में उपग्रहों के प्रक्षेपण के कारण कंपनियां इंतजार नहीं करना चाहती हैं, वे जितनी जल्दी हो सके उपग्रह प्रक्षेपित करना चाहती हैं और छोटे यान उनके लिए विशेष तौर पर तैयार किए गए हैं।’ ‘पिक्सल’ इस साल के अंत में अपने ‘हाइपर-स्पेक्ट्रल’ उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने के लिए इसरो के प्रक्षेपण वाहनों का उपयोग करने पर भी विचार कर रहा है।
‘बाजार खड़ा करने में मदद मिलेगी’
पिक्सल के सीईओ अवैस अहमद ने जुलाई में बताया, ‘फिलहाल हम जो छह उपग्रह बना रहे हैं, उनमें से तीन को स्पेसएक्स और तीन को इसरो प्रक्षेपित करेगा।’ भट्ट ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (आईएन-स्पेस) भी विभिन्न सरकारी मंत्रालयों के साथ उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए छोटे उपग्रहों का एक समूह बनाने के लिए चर्चा कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘ये उपग्रह भारतीय कंपनियां बनाएंगी और इससे घरेलू प्रक्षेपण वाहनों के लिए बाजार खड़ा करने में मदद मिलेगी।’ हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने स्टेज-2 इंजन का परीक्षण किया है, जो विक्रम-1 रॉकेट को ऊर्जा देगा, जिसे इस साल के अंत में प्रक्षेपित करने की योजना है। कलाम-250 नामक स्टेज-2 इंजन प्रक्षेपण वाहन को अंतरिक्ष के वायुमंडल से बाहरी अंतरिक्ष के गहरे ‘वैक्यूम’ में ले जाएगा। आईआईटी-मद्रास द्वारा विकसित अग्निकुल कॉसमॉस भी अगले वर्ष अपना कक्षीय रॉकेट ‘अग्निबाण’ प्रक्षेपित कर सकता है।
