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ईरान ने पाकिस्तान को दे दी आखिरी चेतावनी, पहले से ही कंगाल जिन्ना का देश होगा बर्बाद! बस सितम्बर तक का टाइम

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इस्लामाबाद:

पहले से ही कंगाल चल रहे पाकिस्तान के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यह संकट खड़ा किया है ईरान ने, जिसने एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में पाकिस्तान को अपना आखिर नोटिस भेज दिया है। यह नोटिस ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन को लेकर भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि अगर पाकिस्तान 180 दिनों की पूर्व विस्तारित समय सीमा के दौरान गैस पाइपलाइन का निर्माण नहीं करता है तो तेहरान के पास सितंबर 2024 में पेरिस मध्यस्थता न्यायालय में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट न न्यूज ने इस बारे में जानकारी दी है।

अगर ईरान इस मामले को मध्यस्थता न्यायालय में ले जाता है तो वह 18 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग करेगा, जिसके बारे में वह पहले से ही कहता रहा है। देश की दिवालिया होने से बचाने के लिए आईएमएफ की खैरात पर चल रहे पाकिस्तान के लिए यह रकम बहुत बड़ी है। ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना को 2014 में पूरा होना था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से पाकिस्तान इससे पीछे हट गया था, जिसके चलते यह 10 साल की देरी से है। गैस बिक्री खरीद समझौते (GSPA) पर साल 2009 में फ्रांसीसी कानून के तहत हस्ताक्षर किए गए थे। इसके तहत परियोजना को लेकर किसी तरह का विवाद होने पर पेरिस स्थित मध्यस्थता न्यायालय में दोनों पक्षों की सुनवाई होगी।

अमेरिकी की आड़ लेकर नहीं बचेगा पाकिस्तान
खास बात ये है कि फ्रांसीसी मध्यस्थता न्यायालय अमेरिकी प्रतिबंधों को मान्यता नहीं देता है। जिसका मतलब है कि पाकिस्तान हर्जाने से बचने के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों की आड़ नहीं ले सकता है। ईरान के लिए मुश्किल यह है उसने अपने हिस्से में पाइपलाइन का काम पूर कर लिया है, लेकिन पाकिस्तान पीछे हट रहा है, जिससे तेहरान को नुकसान हो रहा है। पाकिस्तान के इंटर-स्टेट गैस सिस्टम (ISGA) और नेशनल ईरानी गैस कंपनी (NIGC) ने सितम्बर 2019 में एक संशोधित अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत यह तय था कि पाकिस्तान 2024 तक अपनी पाइपलाइन बिछाएगा। इस दौरान ईरान किसी अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाएगा।

सितम्बर में खत्म हो रही टाइमलाइन
संशोधित अनुबंध के तहत पाकिस्तान फरवरी-मार्च 2024 तक अपने क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने के लिए बाध्य था। हालांकि, ईरान ने पाकिस्तान को 180 दिनों की और छूट दी जो सितम्बर 2024 में समाप्त हो रही है। हालांकि, पाकिस्तान अभी भी पाइपलाइन बिछाने से बहुत दूर है। इसलिए ईरान ने अपना अंतिम नोटिस दिया है। ईरान को मध्यस्थता अदालत में जाने के लिए एक कानूनी पेंच भी मजबूर कर रहा है। फ्रांसीसी नियम के तहत, अगर ईरान सितम्बर 2024 तक मध्यस्थता अदालत में नहीं जाता है तो वह पाकिस्तान के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू करने का अपना अधिकार खो देगा।

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