एक चीनी हैकिंग ग्रुप जिसे वोल्ट टाइफून के नाम से जाना जाता है, कैलिफोर्निया स्थित स्टार्टअप वर्सा नेटवर्क्स के सॉफ़्टवेयर में सुरक्षा खामी का उपयोग कर अमेरिका और भारत की इंटरनेट कंपनियों पर हमले कर रहा है। यानी ये भारतीय कंपनियों के लिए भी खतरे की घंटी होने वाला है। ऐसे में आपको भी इसको लेकर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। इंटरनेट सर्विस को लेकर भी लगातार काम किया जा रहा है। ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में इसको लेकर दावा किया है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, लुमेन टेक्नोलॉजीज के ब्लैक लोटस लैब्स के सिक्योरिटी रिसर्चर ने बताया कि वोल्ट टाइफून ने इस खामी का फायदा उठाकर चार अमेरिकी कंपनियों, जिनमें इंटरनेट सेवा प्रदाता शामिल हैं, और एक भारतीय कंपनी में सेंध लगाई है।
यह खामी वर्सा नेटवर्क्स के सॉफ़्टवेयर में पाई गई, जो नेटवर्क कॉन्फ़िगरेशन को प्रबंधित करने में मदद करता है। वर्सा ने जून 2023 में इस बग की पहचान की और इसे ठीक करने के लिए एक पैच जारी किया, लेकिन ऐसा लगता है कि सभी कंपनियों ने समय पर इस पैच को लागू नहीं किया, जिससे वे हमले के लिए असुरक्षित रह गईं। माना जा रहा है कि हैकिंग अभियान अभी भी जारी है।
अमेरिकी सरकार की बहुत पहले से इस ग्रुप पर नजर है। अमेरिका की तरफ से पहले भी इस ग्रुप पर कई संगीन आरोप लगाए गए थे और इसमें कहा गया था कि इस ग्रुप ने अमेरिका के जरूरी बुनियादी ढांचे पर व्यवधान उत्पन्न की है। इसका कनेक्शन भी ताइवान से बताया था। चीनी सरकार ने इन आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया है कि वोल्ट टाइफून वास्तव में “डार्क पावर” नामक एक आपराधिक समूह है और इसका चीन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इन साइबर हमलों के लिए चीन को झूठा दोषी ठहरा रही हैं ताकि बढ़े हुए बजट और सरकारी अनुबंधों को उचित ठहराया जा सके।
