कैनबरा:
मलेशिया के विमान MH370 का खो जाना दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है। इससे जुड़ी कई थ्योरी हैं। एमएच 370 उड़ान का रहस्य कई दावों और कॉन्सपिरेसी थ्योरी से घिरा है। हालांकि लंबे समय तक खोजों के बावजूद इस लापता विमान का पता नहीं चल पाया है। अब एक ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ता ने मलेशिया एयरलाइंस एमएच 370 उड़ान के ‘छिपने’ की सही जगह का पता लगाने का दावा किया है। तस्मानिया यूनिवर्सिटी के एक सहायक शोधकर्ता विन्सेंट लिन ने दावा किया है कि एमएच370 उड़ान दक्षिण पूर्वी हिंद महासागर के 20,000 फीट गहरे समुद्री पठार छेद ब्रोकन रिज में गायब हो गई।
मलेशिया एयरलाइंस के विमान MH370 ने 2014 में कुआलालंपुर से बीजिंग की उड़ान भरी थी। इसमें 239 यात्री सवार थे। उड़ान के दौरान यह वियतनाम के हवाई क्षेत्र से गुजर रहा था। सैटेलाइट डेटा विश्लेषण से पता चला कि विमान संभवतः पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तट से दूर दक्षिणी हिंद महासागर में कभी दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि दो प्रमुख खोजें किसी भी तरह का निष्कर्ष नहीं निकाल सकीं। मलेशियाई एयरलाइंस के विमान का अंतिम प्रसारण उड़ान भरने के 40 मिनट बाद हुआ था।
आखिरी मैसेज के बाद गायब हुआ विमान
वियतनामी क्षेत्र में जब विमान पहुंचा तो कैप्टन जहरी अहमद शाह ने कहा, ‘शुभ रात्रि, मलेशियाई तीन सात शून्य।’ इसके तुरंत बाद विमान का ट्रांसपोंडर बंद कर दिया गया, जिसका मतलब था कि इसे आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता। सैन्य रडार ने दिखाया कि विमान ने उत्तरी मलेशिया और पेनांग द्वीप के ऊपर से उड़ने के लिए अपना उड़ान पथ छोड़ दिया और फिर अंडमान सागर में इंडोनेशियाई द्वीप सुमात्रा के सिरे की ओर निकल गया। इसके बाद वह दक्षिण की ओर मुड़ गया और सारा संपर्क टूट गया।
विमान का नहीं मिला कोई संकेत
कार्डिफ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक जब विमान अपनी यात्रा के अंतिम चरण में था तब वह दक्षिणी हिंद महासागर में था। उन्हें लगता है कि उन्हें पानी के नीच माइक्रोफोन या हाइड्रोफोन से एक संकेत मिला है। विमान इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी खोज रही है। ऑस्ट्रेलिया के नेतृत्व में हिंद महासागर के 120000 वर्ग किमी के एरिया में विमान का कोई संकेत नहीं मिला था। इस खोज को 2017 में निलंबित कर दिया गया। सैटेलाइट डेटा विश्लेषण के मुताबिक जेट निश्चित रूप से दक्षिणी हिंद महासागर में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
