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राहुल गांधी की ‘भारत DOJO यात्रा’ क्या उनकी टीशर्ट पॉलिटिक्स का विस्तार है?

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नई दिल्ली ,

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बाद अब एक और नई यात्रा का ऐलान कर दिया है. उन्होंने इस ऐलान के लिए राष्ट्रीय खेल दिवस को चुना और अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक थ्रोबैक वीडियो शेयर करते हुए ऐलान किया- ‘भारत DOJO यात्रा’ जल्द आने वाली है. इस यात्रा का स्वरूप क्या होगा, इसे लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है. सवाल ये भी है कि क्या राहुल गांधी की ये यात्रा उनकी टीशर्ट पॉलिटिक्स का असरदार विस्तार है?

राहुल की टीशर्ट पॉलिटिक्स
राहुल गांधी 7 सितंबर 2022 के पहले तक अक्सर सफेद पाजामा-कुर्ता में नजर आते थे. यही आज की राजनीति में नेता होने की पहचान भी है. लेकिन भारत जोड़ो यात्रा में राहुल की ड्रेस बदली और यही बदली ड्रेस उनकी पहचान से जुड़ गई है- टीशर्ट. राहुल इस यात्रा के दौरान सफेद टीशर्ट में नजर आए. राहुल और टीशर्ट का साथ भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान भी बना रहा. चुनावी जनसभाएं हों या संसद भवन, राहुल गांधी सफेद टी-शर्ट में ही नजर आते हैं. अब राहुल ने इस नई यात्रा का ऐलान कर दिया है तो सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये उनकी टीशर्ट पॉलिटिक्स का विस्तार है?

भारत DOJO यात्रा टीशर्ट पॉलिटिक्स का विस्तार क्यों
टीशर्ट को लेकर एक नैरेटिव है कि ये युवाओं की ड्रेस है, खासकर ग्रामीण इलाकों में. भारत गांवों देश है और ग्रामीण इलाके ही सत्ता की राह का निर्धारण करते हैं. जाहिर है, राहुल गांधी के सफेद-पाजामा कुर्ता उतार टीशर्ट में मैदान में आने के पीछे भी कहीं न कहीं युवाओं को अट्रैक्ट करने की रणनीति होगी. आंकड़ों के मुताबिक देश की कुल आबादी में करीब 50 फीसदी भागीदारी 18 से 35 वर्ष के युवाओं की है. युवाओं के बीच लोकप्रियता ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएसपी भी रही है. लोकसभा चुनाव से पहले फरवरी के इंडिया टुडे और सी वोटर मूड ऑफ द नेशन सर्वे में 54 फीसदी लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहली पसंद बताया था.

राहुल गांधी 14 फीसदी लोगों की पसंद थे. हालिया मूड ऑफ द नेशन सर्वे में 49 फीसदी लोगों ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए बेहतर विकल्प बताया तो वहीं राहुल की लोकप्रियता का ग्राफ आठ फीसदी बढ़ा है. 22 फीसदी लोगों का मत है कि राहुल बेहतर पीएम साबित होंगे. राहुल गांधी की लोकप्रियता में आए उछाल को उनकी टीशर्ट पॉलिटिक्स, यात्राओं और समाज के अलग-अलग वोटर वर्ग को टार्गेट कर उनके बीच पहुंच जाने की रणनीति को ही दिया जा रहा है. राहुल ने जिस नई यात्रा का ऐलान किया है, उसका फोकस भी बच्चे और युवा ही हैं. मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग तो युवा और बच्चे ही लेते हैं. ऐसे में उनकी ये यात्रा युवाओं को कनेक्ट करने की कोशिश में टीशर्ट पॉलिटिक्स का ही विस्तार है.

यात्राओं से बदला नैरेटिव
राहुल गांधी की यात्राओं से उनको लेकर नैरेटिव बदला है. राहुल गांधी को लेकर विरोधी दल पार्ट टाइम पॉलिटिशियन, चांदी का चम्मच लेकर जन्मे नेता का नैरेटिव सेट करने की कोशिश में रहते थे. कांग्रेस 2014 और 2019 के आम चुनाव में 44 और 52 सीटें ही जीत पाई तो इसके लिए भी राहुल के नेतृत्व और एसी रूम पॉलिटिक्स को वजह बताया गया. लेकिन भारत जोड़ो यात्रा के जरिये मैदान में उतरे राहुल ने इस यात्रा के एक साल बाद हिंसाग्रस्त मणिपुर के इंफाल से महाराष्ट्र के मुंबई तक भारत जोड़ो न्याय यात्रा की. कभी सोनीपत के खेत में पहुंच किसानों की समस्याएं जानीं तो कभी फर्नीचर की दुकान पर पहुंच स्टूल बनाए. इन सबके जरिये राहुल गांधी की इमेज बदली, नैरैटिव में भी बदलाव आया और कांग्रेस लोकसभा चुनाव में 99 सीटें जीतने में सफल रही.

राहुल को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का बयान भी उनको लेकर नैरेटिव में आए बदलाव की ओर ही इशारा करता है. हाल ही में बीजेपी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी ने एक पॉडकास्ट में कहा, “वह एक अलग तरह की पॉलिटिक्स कर रहे हैं. आप उनके कदम को सही, गलत या बचकाना बोल सकते हैं. लेकिन वह अलग तरह की राजनीति कर रहे हैं. राहुल गांधी की पॉलिटिक्स में एक चेंज आया है. जब वह जाति की बात करते हैं तो बहुत संभलकर बोलते हैं. संसद में सफेद टीशर्ट पहनते हैं. वह जानते हैं कि वह युवाओं को किस तरह का मैसेज दे रहे हैं. वह कई मायनों में सोच-विचारकर कदम उठाते हैं.”

युवा केंद्रित पॉलिटिक्स पर फोकस
राहुल गांधी का फोकस युवा केंद्रित राजनीति पर अधिक नजर आ रहा है. टीशर्ट पॉलिटिक्स और अब डोजो यात्रा हो या बेरोजगारी के मुद्दे पर राहुल गांधी का मुखर होकर सरकार को घेरना और अग्निवीर का विरोध, ये सब इसी रणनीति का हिस्सा हैं. मूड ऑफ द नेशन सर्वे में 28 फीसदी लोगों ने कहा है कि बेरोजगारी देश की सबसे बड़ी समस्या है. बेरोजगारी सीधे युवाओं से जुड़ा मसला है और इसका बड़े मुद्दे के रूप में सामने आना भी राहुल गांधी के लिए अवसर की ही तरह है

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