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आगामी चुनाव में इन 15 करोड़ से ज्यादा के वोट बैंक पर कांग्रेस का फोकस, जारी करेगी वाइट पेपर

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नई दिल्ली

कांग्रेस ने देश की तकरीबन 15 करोड़ की आबादी वाले घुमंतू जनजातियों पर फोकस करने की योजना बनाई है। इसके मद्देनजर शनिवार को कांग्रेस जहां घुमंतू या विमुक्त जनजातियों के विमुक्ति दिवस पर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है, जिसमें उसने इस मौके पर एक वाइट पेपर भी जारी करने की योजना बनाई है। उल्लेखनीय है कि अंग्रेजों के समय में इन घुमंतू व खानाबदोश जनजातियों को लेकर 1871 में एक बेहद कठोर कानून पास किया था, जिसे आपराधिक जनजाति कानून का नाम दिया गया। इस कानून में खानाबदोश और अर्ध-खानाबदोश समुदायों को अपराधी घोषित करके उन पर लगातार निगरानी रखी जाने लगी, जिससे उनका जीवन दूभर कर डाला।

घुमंतू जनजातियों के लिए क्या है प्लान
आजादी के पांच साल बाद यानी 31 अगस्त 1952 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू ने उस कठोर कानून को निरस्त करने का फैसला लिया। उस दिन से हर साल 31 अगस्त को ‘विमुक्ति जाति दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा। घुमंतू जनजातियों के तीन वर्ग हैं, जिसमें नाेमेडिक ट्राइब (एनटी), सेमी नोमेडिक ट्राइब (एसएनटी) और डिनोटिफाइड ट्राइब (डीएनटी), इन तीनों को मिलाकर देश में फिलहाल 1000 से ज्यादा उपजातियों या समुदाय हैं।

कांग्रेस के वाइट पेपर में इन बातों पर फोकस
शनिवार को कांग्रेस जहां विमुक्ति जाति दिवस पर जो वाइट पेपर लाने जा रही है, उसमें इन घुमंतू जनजातियों के सामने चुनौतियों से लेकर, इस समुदाय के लिए कांग्रेस का विजन, इनके लिए क्या होना चाहिए जैसे तमाम पहलुओं को सामने रखने की कोशिश की जाएगी। इसका आयोजन कांग्रेस का एससी विभाग कर रहा है। विभाग के अध्यक्ष राजेश लिलोठिया का कहना था कि अभी तक इन समुदाय को लेकर जो भी काम हुआ है, वह कांग्रेस के समय में ही हुआ है। यूपीए के समय में हमारी पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की पहल पर इस समुदाय की स्थिति को समझने के लिए 2005 में रेनके आयोग का गठन किया, जिसमें 2008 में अपनी रिपोर्ट दी थी। लिलोठिया का कहना था कि रेनके आयोग की रिपोर्ट में इन समुदाय की आबादी लगभग 12 करोड़ बताई गई थी, जो आज लगभग 15 करोड़ से ऊपर होगी।

कांग्रेस ने गिनाए अब तक किए कार्य
लिलोठिया बताते हैं कि महाराष्ट्र में कांग्रेस ने इस समुदाय से दो मुख्यमंत्री दिए हैं। इसके अलावा कई सांसद और विधायक भी बनाए हैं। उनका कहना था कि पंजाब में कांग्रेस ने अपनी रोजी रोटी के लिए ट्रेन में चलने वाली घुमंतू जनजातियों की महिलाओं के लिए रेल में फ्री पास की व्यवस्था कराई। वह बताते हैं कि यह कमाने के लिए सिर पर टोकरियां रखकर तरह-तरह का सामान बेचती थीं। पैसा न होने के चलते अकसर ये बिना टिकट सफर करती थीं, पकड़े जाने पर इन्हें तरह-तरह कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना होता था।

कांग्रेस के इस दांव की वजह क्या है
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस की नजर आगामी चुनाव के मद्देनजर इस 15 करोड़ से ज्यादा के वोट बैंक पर है। महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू कश्मीर से लेकर झारखंड तक में इस समुदाय के लोग रहते हैं। दरअसल, इन चारों राज्यों में एससी, एसटी और ओबीसी हैं और 1952 में विमुक्त होने के बाद इनमें कई समुदाय एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय में आते हैं। घुमंतु जनजातियों के कुछ परिचित उपजातियों में बंजारा, बंजारी, ओढ, बाजीगर, नट, सांसी, गाड़िया लोहार, मदारी, सपेरा, बावरिया, कोली आदि प्रमुख हैं।

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