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ब्रिटेन अब ग्रेट नहीं, भारत कौ सौंप दे UNSC की अपनी सीट… पीएम मोदी के दौरे से पहले सिंगापुर के राजनयिक का बड़ा बयान

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सिंगापुर:

सिंगापुर के पूर्व राजनयिक और जानेमाने शिक्षाविद किशोर महबूबानी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में तत्काल सुधार की मांग की है। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि भारत को स्थायी सदस्यता मिले। उन्होंने कहा कि भारत परिषद में स्थायी सीट की हकदार है और उसे ये हक मिलना चाहिए। किशोर महबूबानी का ये बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिंगापुर यात्रा से ठीक पहले आया है। भारत भी अलग-अलग मंचों से बीते कई वर्षों से लगातार यूएनएससी में स्थायी सीट की मांग करता रहा है।

एनडीटीवी के साथ एक साक्षात्कार में महबूबानी ने कहा कि अगर फिलहाल काउंसिल का विस्तार नहीं हो रहा है तो यूके के बजाय भारत इसका स्थायी सदस्य बने। उन्होंने कहा, ‘भारत आज के समय में अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे शक्तिशाली देश है। वहीं ग्रेट ब्रिटेन अब ‘ग्रेट’ नहीं रह गया है। ऐसे में यूके को यूएनएससी की अपनी स्थायी सीट भारत को दे देनी चाहिए।’

ब्रिटेन को अपनी सीट छोड़ने का फायदा ही होगा: महबूबानी
महबूबानी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि ब्रिटेन ने बीते कई दशक से यूएनएससी में अपनी वीटो शक्ति का प्रयोग नहीं किया है। ब्रिटेन वीटो का इस्तेमाल करने पर होने वाली प्रतिक्रिया से डरता है। ऐसे में ब्रिटेन के लिए तार्किक कदम यही है कि वह अपनी सीट भारत को सौंप दे। वैसे भी अगर ब्रिटेन अपनी सीट छोड़ देता है तो उसे वैश्विक मंच पर अधिक स्वतंत्र रूप से काम करने की स्वतंत्रता मिलेगी। उन्होंने कहा कि यूएनएससी को आज की महान शक्तियों का प्रतिनिधित्व करना चाहिए ना कि अतीत की शक्तियां ही इसमें बनी रहनी चाहिए।

यूएनएससी में व्यापक सुधारों की आवश्यकता प महबूबानी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के संस्थापकों ने संगठन को अपने समय की प्रमुख शक्तियों को शामिल करने के लिए डिजाइन किया था। ऐसा इन देशों की प्रभावशीलता को बनाए रखने के स्वार्थ के तहत किया गया। उनका ये बयान भारत के पक्ष से मिलता है। भारत भी ये कहता रहा है कि यूएनएससी में स्थायी-पांच सदस्य देशों के विशेषाधिकार 1945 में दूसरे विश्व युद्ध बाद की मानसिकता को दिखाता है। इस स्थिति में बदलाव किया जाना चाहिए।

वर्तमान में यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्य- चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं। यूएनएससी में केवल स्थायी सदस्यों के पास ही किसी प्रस्ताव पर वीटो करने की शक्ति है। ऐसे में भारत काउंसिल में स्थायी सीट चाहता है। हालांकि तमाम जतन के बावजूद भारत अपनी कोशिश में फिलहाल कामयाब होता नहीं दिख रहा है।

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