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Tuesday, April 7, 2026
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आर्मी अफसर सही या पुलिस वाले? ओडिशा केस में सेना-पुलिस के पूर्व अफसरों की नोकझोंक

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नई दिल्ली:

ओडिशा में एक पुलिस थाने में एक सेना अधिकारी के साथ हुई कथित मारपीट और उनकी मंगेतर के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में हंगामा बढ़ता जा रहा है। अब इस मामले में सेना के पूर्व सैनिकों और सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह सहित सेना के कई पूर्व सैनिकों ने इस घटना को ‘शर्मनाक और भयावह’ बताया है तो दूसरी ओर रिटायर्ड पुलिस अफसरों ने दंपति के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि वे नशे में थे। इन रिटायर्ड पुलिस अफसरों ने हालांकि दोटूक कहा है कि अगर पुलिस वाले दोषी पाए जाएं तो उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

आर्मी अफसर की मंगेतर से अभद्रता के वीडियो वायरल
आरोप-प्रत्यारोप का दौर तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर आर्मी अफसर और उनकी फियांसी को कुछ लोगों के साथ कथित मारपीट करते दिखाने वाला हुए वीडियो वायरल हो गया। महिला ने आरोप लगाया है कि भरतपुर थाने में उसके साथ मारपीट की गई और उसका यौन उत्पीड़न किया गया, जबकि उसके मंगेतर को पुलिस ने अवैध रूप से एक कोठरी में बंद कर दिया। यह घटना तब हुई जब दंपति सड़क पर हुए झगड़े की शिकायत दर्ज कराने थाने गए थे। मामले ने तूल पकड़ने के बाद पांच पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।

पूर्व आर्मी चीफ ने ओडिशा पुलिस की लगाई क्लास
सेना के पूर्व प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) और पूर्व केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने मामले में शामिल पुलिसकर्मियों को ‘वर्दी वाला गुंडा’ बताते हुए इन्हें बचाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वीके सिंह ने ट्वीट किया, ‘ओडिशा के भरतपुर पुलिस स्टेशन में एक सेना अधिकारी की मंगेतर के साथ जो हुआ वह शर्मनाक और भयावह है। मुख्यमंत्री को पुलिसकर्मियों और वर्दी में अपराधियों को बचाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।’

मेजर (रिटायर्ड) गौरव आर्य ने रक्षा मंत्री से लगाई गुहार
इसी तरह, कई अन्य पूर्व सैनिकों ने भी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि अधिकारी के साथ कथित तौर पर कैसा व्यवहार किया गया, उनका कहना है कि सेना में ‘भारी रोष’ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से हस्तक्षेप का आग्रह करते हुए मेजर (सेवानिवृत्त) गौरव आर्य ने ट्वीट किया, ‘ओडिशा पुलिस ने एक सेना अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार किया और यह अपने आप में एक अपराध है। उन्होंने एक महिला के साथ बुरी तरह दुर्व्यवहार किया, अपमानित किया और प्रताड़ित किया… इसके लिए कोई माफी नहीं है।’

मेजर जनरल (रिटायर्ड) हर्ष काकर ने पुलिस को लगाई फटकार
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) हर्ष काकर ने ‘छेड़छाड़ करने वालों, रिश्वत लेने वालों, कुटिल पुलिस और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों की रक्षा करने’ के लिए ओडिशा पुलिस की आलोचना की। उन्होंने ट्वीट किया, ‘वे सच्चाई का साथ नहीं दे रहे हैं। अगर सेना ने विरोध किया तो देश ठप हो जाएगा। क्या सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले संगठनों के साथ ऐसा हो सकता है। घटिया हरकतें।’

पुलिस की तरफ से पूर्व सीबीआई डायरेक्ट ने संभाला मोर्चा
इस बीच, सीबीआई के पूर्व निदेशक एम नागेश्वर राव और ओडिशा सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी कल्याण संघ ने पूछा है कि क्या शराब पीकर गाड़ी चलाने, इंजीनियरिंग के छात्रों के साथ मारपीट करने और पुलिस स्टेशन पर अराजकता फैलाने के लिए अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है? हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि दोषी पुलिस अधिकारियों को कानून के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए। वीके सिंह के ट्वीट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नागेश्वर राव ने कहा कि ‘सेना के अफसर और उसकी मंगेतर के नशे में हुए झगड़े और अभद्र व्यवहार’ के लिए ओडिशा पुलिस की निंदा करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दंपति ने मेडिकल जांच और ब्लड टेस्ट के लिए अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

एम. नागेश्वर राव ने कहा- असलियत कुछ और है
पूर्व सीबीआई प्रमुख ने कहा, ‘भुवनेश्वर में एक सेना अधिकारी और उनकी मंगेतर 10 पैग शराब पीते हैं और देर रात लगभग 2 बजे कार चलाते हैं, लगभग 2.30 बजे इंजीनियरिंग के छात्रों के साथ मारपीट करते हैं, और फिर भरतपुर पुलिस स्टेशन में हंगामा करते हैं, इतना कि स्टाफ को पीसीआर की मदद लेनी पड़ी।’ यह कहते हुए कि पुलिस बल सेना का सम्मान करता है, नागेश्वर राव ने सेना से ‘एक सैनिक के लिए अनुचित आचरण’ और भारतीय सेना के नाम को ‘कलंकित’ करने के लिए अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया।

वीके सिंह से राव की अपील
राव ने कहा, ‘आप (वीके सिंह) सेनाध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रहे। ऐसे में आपका सीधे निष्कर्ष पर पहुंचकर सेना अधिकारी और उसकी मंगेतर के नशे में धुत होकर झगड़ा करने और अभद्र व्यवहार करने के लिए ओडिशा पुलिस की निंदा करना उचित नहीं है जबकि ओडिशा के पुलिस अधिकारी दोषी भी नहीं हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन मैं भारतीय सेना को यह कहकर नहीं फटकारूंगा, ‘क्या भारतीय सेना अपने अधिकारियों को इसी तरह का अनुशासन सिखाती है?’ क्योंकि एक व्यक्ति का पथभ्रष्ट होना एक सम्मानित संस्थान का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।’

ओडिशा रिटायर्ड पुलिस संघ भी मैदान में कूदा
राव के इस पोस्ट पर मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) हर्ष काकर कई सवाल पूछ लिए। उन्होंने दावा किया कि आर्मी अफसर और उनकी मंगेतर के अभद्र आचरण को लेकर जो भी दावे किए जा रहे हैं, वो गलत हैं। वहीं, ओडिशा सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी कल्याण संघ ने एक खुले पत्र में भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं। उसने यह भी कहा कि सेना के अधिकारियों को ‘सार्वजनिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों में व्यवहार’ की सीख देने के लिए एक कोर्स जोड़ा जाना चाहिए।

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