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Tuesday, April 28, 2026
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जयशंकर की वो शर्त क्या है जिससे टेंशन में पाकिस्तान…SCO में चीन-पाक के 3 ‘शैतानों’ पर क्यों प्रहार करना चाहता है भारत

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नई दिल्ली

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस्लामाबाद में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में हिस्सा लिया है। मगर, उनके भाषण को पाकिस्तान ने लाइव ही नहीं किया। कहा जा रहा है कि जयशंकर की खरी-खरी के डर से पाकिस्तान ने यह धूर्ततापूर्ण कदम उठाया है। किसी भी भारतीय विदेश मंत्री का पाकिस्तान दौरा करीब 10 साल बाद हुआ है। हालांकि, उनका यह दौरान द्विपक्षीय नहीं है। इसकी वजह यह है जयशंकर की वो कड़क शर्त, जिससे पाकिस्तान भी टेंशन में हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान पर भारत से संबंध सुधारने का दबाव हे। जानते हैं जयशंकर की सख्ती और उनकी शर्तों के बारे में।

जब डरे हुए पाकिस्तान ने SCO समिट का लाइव बंद किया
SCO शिखर सम्मेलन में जयशंकर ने पाकिस्तान और चीन को नाम लिए बिना ही संकेतों में कहा-सहयोग आपसी सम्मान और संप्रभु समानता पर आधारित होना चाहिए। इसे क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को मान्यता देनी चाहिए। इसे वास्तविक साझेदारी पर बनाया जाना चाहिए। इसमें एकतरफा एजेंडा नहीं होना चाहिए। जयशंकर जब भाषण दे रहे थे तब पाकिस्तान के टेलीविजन ने समिट का लाइव बंद कर दिया। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि चीन-पाक के गठजोड़ पर प्रहार करते हुए कहा कि क्षेत्र में आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसे तीन शैतानों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

वैश्विक बिरादरी में किरिकरी के डर से पाकिस्तान की हरकत
SCO की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बैठक के लिए न्यौता भेजा था, मगर केंद्र सरकार ने जयशंकर को भेजने का फैसला किया। माना जाता है कि जयशंकर कई मंचों पर चीन और पाकिस्तान को उसकी हैसियत बता चुके हैं और खरी-खरी सुना चुके हैं। उनके बयानों को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी खूब तवज्जो मिलती है। ऐसे में हर मंच पर पाकिस्तान यह डरा रहता है कि कहीं जयशंकर उन पर अपने बयानों के बाण न छोड़ दें, क्योंकि इससे उसकी वैश्विक बिरादरी में बहुत किरकिरी ही होगी।

जयशंकर ने कहा था पाकिस्तान से बातचीत का दौर खत्म
हाल ही में एक राजनयिक की राजीव सीकरी की किताब ‘Strategic Conundrums: Reshaping India’s foreign policy’ की लॉन्चिंग के मौके पर जयशंकर ने पाकिस्तान के बारे में सख्त लहजे में कहा कि पाकिस्तान के साथ बिना बाधा के किसी भी बातचीत का दौर खत्म हो चुका है। हर एक्शन के नतीजे होते हैं।

यह है वो शर्त, जिस पर अड़े हैं जयशंकर
डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के मुताबिक, जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा को नई दिल्ली की ओर से एक महत्वपूर्ण फैसले के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा था कि किसी भी पड़ोसी की तरह भारत भी पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखना चाहेगा, लेकिन सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज करके यह नहीं हो सकता। भारत ने लगातार कहा है कि पाकिस्तान के साथ बेहतर संबंध केवल आतंक और हिंसा से मुक्त माहौल में ही संभव हो सकते हैं।

अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से खत्म कर लिए थे संबंध
डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लिए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के भारत के फैसले के बाद दोनों राष्ट्रों के संबंध और बिगड़ गए। भारत की ओर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद पाकिस्तान ने भारत से अपने राजनयिक संबंधों को सीमित कर लिया था।

चीन की आड़ लेकर पाकिस्तान ने SCO में कश्मीर पर दिया बयान
SCO की बैठक में चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग भी शामिल हुए हैं, जो 4 दिवसीय द्विपक्षीय यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचे हैं। चीनी पीएम ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। चीन-पाकिस्तान के अधिकारियों की बैठक के बाद दोनों देशों ने 30 सूत्रीय साझा बयान जारी किया, जिसमें कश्मीर मुद्दा भी शामिल था।

चीन ने कहा-UN चार्टर से हल हो कश्मीर मुद्दा
चीन-पाकिस्तान के 30 सूत्रीय बयान के 25वें बिंदु में कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया गया है। चीनी प्रधानमंत्री ने कश्मीर मुद्दे को UN चार्टर से हल करने की बात कही है। चीन ने जोर दिया है कि कश्मीर मुद्दे को दोनों देश शांतिपूर्ण ढंग से हल करें। साथ ही इस समझौते में एक बात यह भी कही गई है कि चीन पाकिस्तान की संप्रभुता की रक्षा करेगा, जो परोक्ष रूप से भारत के लिए है।

जयशंकर ने चीन को भी सुना चुके हैं खरी-खोटी
हाल ही में अमेरिका के दौरे पर गए जयशंकर ने कहा था कि चीन के साथ हमारे अपने संबंधों की एक लंबी कहानी है। हालांकि, संक्षेप में कहें तो सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए हमारे बीच समझौते हुए थे, चीन ने उन समझौतों का उल्लंघन किया है।

SCO के दायरे में दुनिया की 40 फीसदी आबादी
SCO में यूरेशिया के लगभग 80% क्षेत्र और इसके दायरे में दुनिया की 40% आबादी है। SCO के 9 सदस्य देश हैं- चीन, भारत, पाकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिजस्तान, ताजिकिस्तान, बेलारूस, ईरान और उज्बेकिस्तान। ईरान वर्ष 2023 में इसका सदस्य बना। अफगानिस्तान और मंगोलिया पर्यवेक्षक का दर्जा रखते हैं। संगठन के वर्तमान और आरंभिक संवाद भागीदारों में अजरबैजान, आर्मेनिया, मिस्र, कतर, तुर्किए, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका शामिल हैं।

SCO के मकसद को क्या फेल कर रहे चीन-पाकिस्तान
SCO का मकसद सदस्य देशों के बीच विश्वास और पड़ोसी व्यवहार बढ़ाना है। SCO का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों बीच शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना है। तकनीकी, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक स्तरों पर सहयोग बढ़ाना है। परिवहन, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, ऊर्जा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। मगर, चीन और पाकिस्तान दोनों ही इस क्षेत्र में SCO के मकसद को फेल कर रहे हैं।

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