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करवा चौथ पर पत्नी ने रखा था व्रत, आतंकियों ने छीन लीं खुशियां… गांदरबल हमले ने उजाड़ दी रुचि की जिंदगी

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श्रीनगर/जम्मू कश्मीर

जम्मू कश्मीर के गांदरबल में आतंकियों की घिनौनी करतूत पर पूरे देश में आक्रोश है। आतंकी हमले में एक डॉक्टर समेत छह प्रवासी लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमे शामिल शशि भूषण पेशे से आर्किटेक्चरल डिजाइनर थे। जब वह निर्माणधाीन सुरंग पर ड्यूटी करते थे तब घर में उनकी पत्नी रुचि एब्रोल ने पति की लंबी उम्र की कामना के साथ करवा चौथ का व्रत किया हुआ था। रुचि घर पर अपने पति शशि भूषण की फोन कॉल का इंतजार कर रही थी लेकिन उन्हें वो पति की मौत की कॉल आई। शशि भूषण की मौत के बाद परिवार का बुराहाल है। उनके परिवार में पांच साल की बेटी है।

आतंकी गंदे हैं…बेटी का गुस्सा फूटा
शशि भूषण की पांच साल की बेटी ने रोते हुए कहा कि आतंकवादी बहुत गंदे हैं, उन्होंने मेरे पापा को मार दिया। पत्नी रुचि ने रुंधे हुए गले से कहा कि उन्होंने तो सबके घर उजाड़ दिए। हमारा तो कोई नहीं बचा देखभाल के लिए। सिर्फ यही थे जो हमारा ख्याल रखते थे। रुचि और उनका परिवार हताश है। परिवार ने सरकार ने मदद की गुहार लगाई है। रुचि एब्रोल के अनुसार वह पति के फोन का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं। जैसे ही उन्हें ऐसी गाेली मारे जाने की सूचना ने दुनिया ही हिलाकर रख दी।

पांच बजे आखिरी बार बात
रुचि ने बताया कि मैंने शाम को उनसे बात की। उन्होंने किसी भी तरह की धमकी का जिक्र नहीं किया। मैं अपने करवा चौथ व्रत के हिस्से के रूप में मंदिर जा रही थी, और हमारी थोड़ी बातचीत हुई। मैंने लौटने के बाद उन्हें फोन करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। उसके बाद उनका फोन बंद हो गया। शशि की बहन दिव्या ने कहा कि उनकी जिंदगी बिखर गई है। करवा चौथ हमारे लिए तबाही का दिन बन गया है। शशि छह साल से एक निर्माण कंपनी APCO के साथ काम कर रहे थे, और परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। हाल ही में वह अपने बेटे के कॉलेज एडमिशन के लिए जम्मू वापस घर लौटे थे। उनका सपना था कि उनका बेटा इंजीनियर बने। अब उनके परिवार का भविष्य अनिश्चित है।

फोन पर बाते करते वक्त लगी गोली
जम्मू के अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर शिशिर गुप्ता ने कहा कि इस नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती, लेकिन परिवार अभी भी गमगीन है। सैकड़ों पड़ोसी और रिश्तेदार परिवार को अपनी संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए आए हैं, लेकिन दुख स्पष्ट है। रुचि की तरह ही आतंकवादी हमले में मारे गए सात लोगों में से एक गुरमीत सिंह अपनी पत्नी से फोन पर बात कर रहे थे, तभी उन्हें गोली लग गई। सोमवार उनके पिता ने मीडिया को बताया कि 45 साल के गुरमीत सिंह पंजाब के गुरदासपुर जिले के सखोवाल गांव के रहने वाले थे और एक कंपनी में काम करते थे।

कैम्प में लौटते वक्त दागी गोलियां
यह हमला रविवार शाम को उस समय पर हुआ था। अज्ञात हमलावरों ने काम करने के बाद शिविर में लौट रहे मजदूरों और कर्मचारियों के एक समूह पर गोलीबारी की। गुरमीत सिंह के पिता धरम सिंह ने बताया कि उनके बेटे ने अपनी पत्नी को बताया था कि उसे गोली लगी है और फिर उसने दम तोड़ दिया। धरम सिंह ने बताया कि बेटा पिछले पांच साल से कश्मीर में रह रहा था और अपने परिवार का मुख्य कमाने वाला भी था, जिसमें उसकी पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा शामिल हैं। उसके परिवार ने उसकी मौत पर दुख व्यक्त किया और राज्य सरकार से सहायता प्रदान करने का आह्वान किया।

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