मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बाद भारत में रसोई गैस की भारी किल्लत शुरू हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर किलोमीटर लंबी लाइनें और गैस की कालाबाजारी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। हालत यह है कि जहाँ घरेलू सिलेंडर के दाम ब्लैक में दोगुने हो गए हैं, वहीं कॉमर्शियल गैस न मिलने से होटल और रेस्टोरेंट्स में चूल्हे जलने की नौबत आ गई है। ग्रामीण भारत पर ’45 दिन’ की मार पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में जानकारी दी है कि संकट को देखते हुए ग्रामीण इलाकों के लिए बुकिंग नियम बदल दिए गए हैं। अब गांवों में एक सिलेंडर लेने के बाद अगला सिलेंडर कम से कम 45 दिन के अंतराल पर ही मिल सकेगा। इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन का संकट और गहराने की आशंका है। राज्यों का हाल: कालाबाजारी चरम पर अखबार की पड़ताल में सामने आया है कि प्रशासनिक दावों के उलट जमीन पर हालात बेहद खराब हैं: मध्य प्रदेश: भोपाल में 1,910 रुपये का कॉमर्शियल सिलेंडर 4,000 रुपये में खुलेआम बेचा जा रहा है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के बावजूद कालाबाजारी पर लगाम नहीं लग पा रही है। बिहार: यहाँ 900 रुपये वाला घरेलू सिलेंडर 1,800 रुपये में बिक रहा है, जबकि कॉमर्शियल सिलेंडर के लिए 5,000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश: लखनऊ में लाइन में खड़े होने पर सिलेंडर नहीं मिल रहा, लेकिन 1,600 रुपये देने पर तुरंत ‘होम डिलीवरी’ हो रही है। पंजाब: जालंधर और लुधियाना में सप्लाई लगभग ठप है। 1,900 वाला कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 3,500 रुपये में ब्लैक में मिल रहा है। गैस खत्म, इंडक्शन की डिमांड 50% बढ़ी गैस की कमी के कारण अब लोग बिजली से चलने वाले उपकरणों की ओर रुख कर रहे हैं। जयपुर के जयंती बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन गुप्ता के अनुसार, बाजार में इंडक्शन की मांग में 50% का उछाल आया है। होटलों ने भी गैस की जगह इंडक्शन और पारंपरिक चूल्हों पर खाना पकाना शुरू कर दिया है। बेंगलुरु जैसे महानगरों में भी होटलों के बाहर लकड़ी के चूल्हों पर खाना पकता देखा जा रहा है।
विशेषज्ञ की राय: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव यदि लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में एलपीजी के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल की कीमतों और सप्लाई पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
