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ब्रिक्‍स के विस्‍तार पर पीएम मोदी ने कजान में पुतिन और जिनपिंग को सुना दिया! क्‍या पाकिस्‍तान पर फंस गया पेच?

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कजान/इस्लामाबाद

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मीटिंग रूस के कजान में चल रही है। BRICS एक उभरता हुआ आर्थिक ब्लॉक है। भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि ब्रिक्स से बड़ी उम्मीदें हैं। इसके अलावा कहा कि ब्रिक्स के विस्तार का कोई भी निर्णय आम सहमति से लिया जाना चाहिए। दरअसल पाकिस्तान और तुर्की समेत लगभग 30 देश ब्रिक्स का सदस्य बनने को इच्छुक हैं। रूस और चीन पाकिस्तान के ब्रिक्स में शामिल होने का समर्थन करते हैं। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि आम सहमति से ही ब्रिक्स का विस्तार होगा।

पीएम मोदी ने मीटिंग में कहा कि भारत ब्रिक्स में साझेदार देश के रूप में नए देशों का स्वागत करने के लिए तैयार है। उन्होंने आगे कहा, ‘इस संबंध में सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए और ब्रिक्स संस्थापक सदस्यों के विचार का सम्मान होना चाहिए।’ रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने मीटिंग की अध्यक्षता की।पुतिन के मुताबिक लगभग 30 देश इसमें शामिल होना चाहते हैं। भारत के अलावा ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका सबसे पुराने सदस्य हैं। वहीं नए सदस्यों के रूप में पिछले साल मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हुए हैं।

भारत के समर्थन की उम्मीद
पाकिस्तान के मुताबिक ब्रिक्स में शामिल होने के लिए उसके रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा भारत है। हालांकि पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि ब्रिक्स के संस्थापक सदस्यों में से एक भारत अपने विरोध को नरम करने का संकेत दे रहा है। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक रूस के साथ बातचीत और भारत-चीन के बीच कम होते तनाव के कारण ऐसा हो रहा है। पाकिस्तान ने अगस्त 2023 में ब्रिक्स का सदस्य बनने के लिए आवेदन किया था। रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआत में भारत की ओर से विरोध मिला। लेकिन रूस ने पाकिस्तान को समर्थन दिया।

पाकिस्तान को लगा झटका!
पाकिस्तान में सितंबर 2023 में रूसी डिप्टी पीएम एलेक्सी ओवरचुक ने सार्वजनिक रूप से ब्रिक्स में पाकिस्तान को शामिल करने का समर्थन किया। कजान में होने वाले शिखर सम्मेलन में भारत के नरम रुख की चर्चा हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि पुतिन और पीएम मोदी के बीच मीटिंग के बाद ऐसी अटकलें तेज हो गई हैं कि भारत अपने विरोध को नरम कर सकता है, जिसमें रूस मध्यस्थता करेगा। हालांकि पीएम मोदी ने इस मीटिंग में साफ कर दिया है कि संस्थापक सदस्यों के विचारों का विस्तार के लिए सम्मान होना चाहिए। यह पाकिस्तान के लिए झटका हो सकता है।

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