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ज्ञानवापी परिसर में न सर्वे होगा, न खुदाई… वाराणसी कोर्ट से हिंदू पक्ष को बड़ा झटका, खारिज हुई याचिका

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वाराणसीः

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष को बड़ा झटका लगा है। हिंदू पक्ष की संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर के अतिरिक्त सर्वे की अपील पर कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष के अतिरिक्त सर्वे की मांग को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद में न तो सर्वे होगा और न ही खुदाई होगी। ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे को लेकर वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। एएसआई सर्वे होने के बाद अतिरिक्त सर्वे की जरूरत पर कोर्ट ने सवाल किया था। 8 महीने तक इस मामले की सुनवाई चली थी, जिसके बाद आज इस पर फैसला आ गया। हिंदू पक्ष अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं है और मामले को लेकर हाई कोर्ट में जाने की तैयारी में है।

हिंदू पक्षकार विजय शंकर रस्तोगी ने अपनी याचिका में दावा किया था कि मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे भगवान आदि विश्वेश्वर का 100 फीट का विशाल शिवलिंग और अरघा स्थित है, जिसका पेनीट्रेटिंग राडार की मदद से सर्वे किया जाना चाहिए। इसके अलावा वजूखाने और बचे हुए तहखानों के सर्वे की भी मांग की गई थी। मुस्लिम पक्ष ने इन मांगों का विरोध किया था।

क्या है हिदू पक्ष का दावा
हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि मुख्य गुंबद के नीचे 100 फुट का शिवलिंग मौजूद है और परिसर के शेष स्थल की खुदाई कराकर एएसआई सर्वे कराया जाना चाहिए। यह मामला 1991 में सोमनाथ व्यास द्वारा दाखिल किए गए वाद से जुड़ा है। हिन्दू पक्ष के वकील विजय शंकर रस्तोगी ने इस पर तफ्सील से जानकारी देते हुए बताया कि सिविल सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट वाराणसी में केस संख्या 610, वर्ष 1991 के अंतर्गत लंबित है वाद में एएसआई सर्वे पहले ही हो चुका था लेकिन इस केस में आज 08 अप्रैल 2021 को एक आदेश पारित हुआ है। उस आदेश के अनुपालन में कोई आदेश नहीं हुआ था, इसलिए मेरे द्वारा प्रार्थना पत्र दिया गया था कि संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर का अतिरिक्त सर्वे कराया जाए। जो पूर्व के सर्वे में नहीं हुआ है वह कराया जाए।

मुस्लिम पक्ष के पक्ष में आपने क्या दलीलें रखीं?
उन्होंने आगे कहा कि सुनवाई में मुस्लिम पक्ष इसके विपरीत कहता है। हिंदू जो भी कहेगा, वह बिल्कुल विपरीत ही कहेंगे। वह कह रहे थे कि सर्वे उचित नहीं है और सर्वे नहीं होना चाहिए। वह ऐसी बातें कर रहे थे जिसका कोई मतलब नहीं है। किस तरीके का सर्वे हो इस पर वह कहते हैं, ‘हम ऐसा करना चाहते हैं एक सर्वेक्षण कि केंद्रीय गुंबद के नीचे, स्वयंभू ज्योतिर्लिंग का सौ फीट लंबा शिवलिंग है और अरघा सौ फीट गहरा है। उन्होंने इसे बड़ी सीमाओं और पट्टियों से ढक दिया है और इसे अस्तित्वहीन कर दिया है। हम इसे प्रकाश में लाना चाहते हैं। न तो एएसआई और न ही जीपीआर सिस्टम वहां काम कर रहा था।’

क्यों चाहिए सर्वे
उन्होंने आगे बताया कि न तो एएसआई और न ही जीपीआर सिस्टम स्पष्ट आकार और नीचे की हर चीज की रिपोर्ट देने में सक्षम था। इसलिए मेरी अदालत से यही प्रार्थना थी कि इस संरचना से हटकर, इसे कोई नुकसान पहुंचाए बिना, 10 मीटर, 5 मीटर दूर गड्ढा खोदकर अंदर जाएं और उस स्तर पर देखें कि स्वयंभू विश्वेश्वर का ज्योतिर्लिंग, जिनके नाम से काशी जानी जाती है, जिनके नाम से काशी दुनिया में प्रसिद्ध है, ऐसे विश्वनाथ वहां मौजूद हैं या नहीं और उसके बारे में रिपोर्ट करें।”

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