नई दिल्ली
1990 के दशक की बात है, जब यूरोप का बीमार देश कहे जाने वाले तुर्की ने इजरायली हेरॉन जैसे विदेशी यूएवी खरीदने की इच्छा जताई। तब इजरायल ने कहा था कि वह तुर्की को ड्रोन तो देगा, मगर उसे चलाएंगे इजरायली पायलट। यह बात तब तुर्की को चुभ गई। इस वजह से तुर्की ने खुद का ड्रोन विकसित करना शुरू कर दिया। सैन्य ड्रोन पर विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए उसने अपनी ड्रोन इंडस्ट्री खड़ी कर दी। अब इसी तुर्की ने कमाल कर दिया है। वह सैन्य ड्रोन के मामले में दुनिया के कई देशों से मीलों आगे निकल चुका है। जानते हैं तुर्की के इस कायाकल्प की कहानी।
अमेरिका, चीन, इजरायल को पछाड़कर आगे निकला
अमेरिका के सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी (CNAS) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा गया है कि ड्रोन की तकनीक और आपूर्ति के मामल में तुर्की ने अमेरिका, चीन और इजरायल जैसे वल्र्ड लीडरों को भी पछाड़ दिया है। तुर्की के इस कारनामे ने दुनिया को हैरान कर दिया है। 2018 के बाद से ही तुर्की, चीन और अमेरिका ने संयुक्त रूप से 40 देशों को 69 हथियारों से लैस ड्रोन बेचे हैं।
तुर्की की सैन्य ड्रोन मार्केट में हिस्सेदारी गजब की
दुनिया में जितने सैन्य ड्रोन बेचे गए, उनकी बिक्री में अकेले तुर्की की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत है, जिसमें चीन का योगदान 26 प्रतिशत है और अमेरिका केवल 8 प्रतिशत के साथ पीछे है। एक्सपर्ट का कहना है कि तुर्की ने अपने घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे तुर्की सैन्य ड्रोन के मार्केट में अगुवा बन चुका है।
कभी इजरायल ने तकनीक देने से किया था मना
एडवांस्ड यूएवी ड्रोन विकसित करने के पीछे एक बड़ी वजह थी अमेरिका और इजरायल की तकनीक देने से इनकार करना। कभी अमेरिका और इजरायल ने सैन्य ड्रोन देने में तुर्की पर पाबंदी भी लगाई थी। कभी उसके आग्रह को ठुकरा दिया था। इसके बाद तुर्की ने तय किया कि वह खुद ड्रोन बनाएगा। शुरुआत में उसने टोही, निगरानी और फायर फाइटिंग के लिए ड्रोन बनाए।
क्यों तुर्की के सैन्य ड्रोन की बढ़ रही है दुनिया में मांग
तुर्की के हमलावर ड्रोन की डिमांड पूरी दुनिया में इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि तुर्की के ड्रोन सस्ते और तेजी से डिलीवर होते हैं। तुर्की के ड्रोन की मारक क्षमता अच्छी होती है। इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन, लीबिया, इराक, सीरिया, अजरबेजान जैसे कई देशों में किया जा रहा है। इसके अलावा, तुर्की के ड्रोन की सफलता दर काफी ज्यादा है। इनमें मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं और ये सटीक मार करते हैं।
7.5 लाख घंटे से ज्यादा की उड़ान भर चुके हैं
TB2 का पहली बार 2014 में तुर्की सेना की ओर से इस्तेमाल किया गया था। तुर्की का यह हमलावर ड्रोन 2023 के अंत तक 7,50,000 घंटे से अधिक की उड़ान भर चुका था। ये किसी भी देश के आसमान में ऊंची और लंबी उड़ान भर सकते हैं।
गोला-बारूद से लदे जहाजों को समुद्र में डुबो सकते हैं
तुर्की के सैन्य ड्रोन में एडवांस्ड सेंसर लगे होते हैं। ये गोला-बारूद का बड़ा पेलोड ले जा सकते हैं। बेकरटार टीबी 3 ड्रोन और अन्य अनक्रूड डिलीवरी सिस्टम जैसे किजिलेल्मा लड़ाकू विमान और गोला-बारूद के जखीरे से लदे जहाजों के खिलाफ आत्मघाती मिशन में भी काम आते हैं।
