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बीजेपी में जाने वाले आठ विधायक अयोग्य नहीं… गोवा विधानसभा स्पीकर ने खारिज की कांग्रेस की याचिका

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पणजी:

महाराष्ट्र और झारखंड चुनावों के बीच कांग्रेस पार्टी को गाेवा में बड़ा झटका लगा है। गोवा विधानसभा अध्यक्ष रमेश तावड़कर ने 2022 में सत्तारूढ़ बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेस के आठ बागी विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। गोवा कांग्रेस के पूर्व प्रमुख गिरीश चोडानकर ने विधायक दिगंबर कामत, एलेक्सो सेक्वेरा, संकल्प अमोनकर, माइकल लोबो, डेलिलाह लोबो, केदार नाइक, रुडोल्फ फर्नांडीस और राजेश फलदेसाई के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की थी।

अयोग्य घोषित करने की मांग थी
चोडानकर ने अपनी याचिका में मांग की थी कि विधानसभा अध्यक्ष संविधान के अनुच्छेद 191 के साथ दसवीं अनुसूची के पैरा-दो के तहत इन आठ विधायकों को इस आधार पर अयोग्य घोषित करें कि उन्होंने मूल पार्टी (कांग्रेस) की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दी थी। इन विधायकों ने कांग्रेस के टिकट पर गोवा विधानसभा के लिये चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। चोडानकर ने अपनी याचिका में कहा कि इस मामले में मूल राजनीतिक दल का कोई वैध विलय नहीं है। कांग्रेस ने चुनावों में कुल 11 सीटें जीती थीं।

यह वैध विलय नहीं था
चोडानकर ने अधिवक्ता अभिजीत गोसावी के जरिये दायर याचिका में कहा कि यह निर्विवाद तथ्य है कि प्रतिवादी वर्तमान विधानसभा के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में विधिवत निर्वाचित हुए थे और अब भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध हैं। याचिका में दलील दी गई थी कि इस मामले में कोई वैध विलय नहीं था, क्योंकि राजनीतिक दल के विलय के लिए जरूरी दो तिहाई सदस्यों की सहमति की दोहरी आवश्यकता पूरी नहीं हुई थी।

2022 में बीजेपी में गए थे विधायक
याचिका में कहा गया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा-चार में किसी राजनीतिक दल का विधायक दल में विलय करने की बात नहीं कही गई है। ऐसा विलय संविधान की 10वीं अनुसूची के उद्देश्य के विपरीत है। मौजूदा मामले में इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि मूल राजनीतिक दल (कांग्रेस) का विलय नहीं हुआ है। हालांकि आठ विधायकों का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता पराग राव ने दलील दी कि अध्यक्ष ने 14 सितंबर, 2022 को एक पत्राचार के माध्यम से यह बात रिकॉर्ड पर रखा है कि आठ विधायकों ने कांग्रेस विधायक दल का भाजपा में विलय करने का प्रस्ताव पारित किया है।

स्पीकार बोले, अयोग्यता लागू नहीं होगी
राव ने आगे कहा कि बीजेपी ने इस विलय को स्वीकार कर लिया है, क्योंकि उसने इनमें से कुछ विधायकों को राज्य सरकार में मंत्री बनाया है। अध्यक्ष तावड़कर ने उनकी याचिका खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि निर्वाचित सदस्य की मूल राजनीतिक पार्टी का किसी अन्य राजनीतिक पार्टी में विलय होने पर, निर्वाचित सदस्य को किसी भी स्थिति में अयोग्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा, यानी चाहे वह विलय के साथ जाना चाहे या उससे असहमत हो।तावड़कर ने फैसला सुनाया कि विलय के मामले में दलबदल के आधार पर अयोग्यता लागू नहीं होगी।

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