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Tuesday, March 31, 2026
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‘बुलडोजर जस्टिस मंजूर नहीं’, सुप्रीम कोर्ट बोला- किसी भी संपत्ति को ढहाने से पहले उठाए जाएं ये 6 कदम

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में ‘बुलडोजर जस्टिस’ को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की संपत्ति को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के नहीं ध्वस्त किया जा सकता है। यह फैसला उन मामलों में आया है जहां कई राज्यों में अवैध निर्माणों को ढहाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया जा रहा था।

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में 2019 में हुए एक घर विध्वंस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कानून के शासन के तहत बुलडोजर जस्टिस पूरी तरह से अस्वीकार्य है। संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत हर नागरिक को संपत्ति का अधिकार है और इस अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को याचिकाकर्ता को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया, जिसका घर सड़क विकास के लिए ध्वस्त कर दिया गया था।

किसी भी संपत्ति को ढहाने से पहले ये 6 कदम उठाए जाएं
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में किसी भी संपत्ति को ढहाने से पहले कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अब से किसी भी संपत्ति को ढहाने से पहले निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना होगा:

  1. किसी भी संपत्ति को ढहाने से पहले अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मौजूदा भूमि रिकॉर्ड और मानचित्रों के अनुसार यह संपत्ति वास्तव में अवैध है या नहीं।
  2. अधिकारियों को वास्तविक अतिक्रमण की पहचान करने के लिए एक उचित सर्वेक्षण करवाना होगा।
  3. कथित अतिक्रमणकारी को तीन लिखित नोटिस जारी किए जाएंगे, ताकि उसे अपनी बात रखने का मौका मिले।
  4. नोटिस के जवाब में आए सभी आपत्तियों पर विचार किया जाएगा और उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।
  5. अगर कोई संपत्ति अवैध पाई जाती है तो अतिक्रमणकारी को इसे स्वेच्छा से हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।
  6. अगर कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति स्वेच्छा से नहीं हटाता है तो सरकार को कानूनी प्रक्रिया के तहत उस भूमि का अधिग्रहण करना होगा।

गैरकानूनी ढंग से संपत्ति ढहाने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई
सीजेआई ने कहा कि जो भी सरकारी अधिकारी किसी भी व्यक्ति की संपत्ति को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के ढहाते हैं या ऐसी कार्रवाई को मंजूरी देते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून का शासन सभी के लिए समान है और कोई भी अधिकारी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। सार्वजनिक अधिकारियों को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और किसी भी कार्रवाई के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

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