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कनाडा बनने जा रहा दुनिया की अगली न्यूक्लियर एनर्जी सुपरपावर! यूरेनियम का अथाह भंडार खोल सकता है किस्मत

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ओटावा

दुनिया में बढ़ते जलवायु संकट के समाधान के लिए परमाणु ऊर्जा पर नए सिरे से जोर दिया जा रहा है और इसमें यूरेनियम भंडार काफी अहम है। ऐसे में आने वाले वक्त में कनाडा की भूमिका न्यूक्लियर एनर्जी में अहम हो सकती है। यूरेनियम के अपने विशाल भंडार की मदद से कनाडा आने वाले वर्षों में न्यूक्लियर एनर्जी की सुपरपावर भी बन सकता है। यूरेनियम खनन पर दो दशक से काम कर रहे कारोबारी लेह क्यूरीर का कहना है कि इस क्षेत्र में दुनिया के नजरिए में बड़ा बदलाव आ रहा है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011 में जापान में फुकुशिमा परमाणु संयंत्र दुर्घटना ने परमाणु ऊर्जा के बारे में दुनिया के दृष्टिकोण को नकारात्मक कर दिया लेकिन पिछले पांच वर्ष में इस नजरिए में बदलाव आया है। यही वजह है कि इस साल यूरेनियम की वैश्विक कीमत 200 फीसदी से अधिक बढ़ी है। ऑस्ट्रेलिया में जन्मे कारोबारी क्यूरीर इस बदलाव का श्रेय उस रवैये को देते हैं, जो 2018 में बिल गेट्स के परमाणु ऊर्जा को ‘जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आदर्श’ बताए जाने के बाद आया है।

कनाडा की बदल सकती है तस्वीर!
लेह क्यूरीर नेक्सजेन के हेड हैं, ये कंपनी कनाडा के उत्तरी सस्केचेवान में यूरेनियम-समृद्ध अथाबास्का बेसिन में खनन कर रही है। इस प्रोजेक्ट की कीमत करीब चार अरब डॉलर है। ये कीमत तब है जबकि खदान 2028 के बाद ही व्यावसायिक रूप से चालू हो सकेगी। रेगुलेटर्स से इसको मंजूरी मिल जाती है तो नेक्सजेन का ये प्रोजेक्ट अकेले ही कनाडा को आने वाले दशक में यूरेनियम का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश बना देगी।

नेक्सजेन के अलावा दूसरी भी कई कंपनियां क्षेत्र में खनन परियोजनाएं शुरू कर रही हैं। इससे कई निष्क्रिय खदानें फिर से खोल दी गई हैं। खनन कंपनियां कनाडा को परमाणु ऊर्जा के एक प्रमुख प्लेयर की तरह देख रही हैं, जो यूरेनियम की मांग को पूरा करती है। सीओपी28 जलवायु सम्मेलन में दो दर्जन देशों ने 2050 तक अपने परमाणु ऊर्जा उत्पादन को तीन गुना बढ़ाने की बात कही है। ऐसे में ये इस पर आने वाले वक्त में खासतौर से जोर देखने को मिलने वाला है।

न्यूक्लिर एनर्जी पर्यावरण के लिए बेहतर
परमाणु ऊर्जा (न्यूक्लिर एनर्जी) को प्राकृतिक गैस या कोयले जैसे दूसरे ईंधन के मुकाबले कम कार्बन उत्सर्जन के लिए जाना जाता है। इससे ये पर्यावरण को कम नुकसान करता है और जलवायु संकट में एक बेहतर विकल्प बनता है। विश्व परमाणु संघ का अनुमान है कि दुनियाभर में बन रही बिजली का 10 फीसदी परमाणु स्रोतों से आता है, जबकि 50 प्रतिशत से ज्यादा गैस और कोयले से उत्पन्न होता है। ऐसे में दुनियाभर में परमाणु उर्जा की ओर जाने पर जोर दिया जा रहा है।

न्यूक्लियर एनर्जी के लिए यूरेनियम की जररूत है। यूरेनियम दुनियाभर में पाया जा सकता है, लेकिन ये यह कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और कजाकिस्तान में सबसे ज्यादा है। विश्व परमाणु संघ के मुताबिक, कजाखस्तान साल 2022 में 21,200 टन के साथ सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक था। इसके बाद कनाडा (7,400 टन), नामीबिया (5,600), ऑस्ट्रेलिया (4,600), उज्बेकिस्तान (3,300) और रूस (2,500 टन) का नंबर आता है।

कनाडा का यूरेनियम क्वालिटी में शानदार
मैकमास्टर यूनिवर्सिटी में परमाणु इंजीनियरिंग के प्रोफेसर मार्कस पिरो का कहना है कि कनाडा के अथाबास्का क्षेत्र को जो चीज खास बनाती है, वह यह है कि इसका यूरेनियम विशेष रूप से उच्च श्रेणी का है। पिरो के मुताबिक, कनाडा ने अपने यूरेनियम को अन्य देशों को बेचने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। कनाडा ने केवल परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का आदेश दिया है।

कनाडा को ‘टियर-वन परमाणु राष्ट्र’ के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यह खनन से लेकर विनिर्माण चरण तक परमाणु ईंधन का उत्पादन करने की अपनी क्षमता रखता है। वर्तमान में कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक है, जो कुल वैश्विक उत्पादन का लगभग 13 फीसदी है। नेक्सजेन का अनुमान है कि एक बार जब इसकी खदान चालू हो जाएगी, तो यह इसे 25 फीसदी तक बढ़ा देगा।

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