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इंडिया की ईमानदारी… बॉर्डर समझौते के बाद कैसे सुधरेंगे संबंध? भारत पर ठीकरा फोड़ने लगा चीन का सरकारी भोंपू

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बीजिंग

चीन के विदेश मंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी के पोलिटिकल ब्यूरो के सदस्य वांग यी की हाल ही में ब्राजील में भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से मुलाकात हुई है। ये मुलाकात इसलिए खास रही क्योंकि दोनों देशों में लंबे समय से बॉर्डर पर तनातनी चल रही थी। बीते महीने इस मुद्दे पर समझौते बाद दोनों नेताओं की यह पहली बैठक थी। हालांकि इस बैठक की सकारात्मकता के बावजूद चीन की सरकारी मीडिया भारत पर ठीकरे फोड़ते हुए कह रहा है कि दिल्ली की जिम्मेदारी बीजिंग के साथ अच्छे रिश्ते के लिए ज्यादा है। ऐसे में नई दिल्ली को मतभेदों के बजाय आम सहमति पर आगे बढ़ना चाहिए।

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने दोनों देशों के रिश्ते पर कहा है कि मतभेदों के बावजूद चीन और भारत को अच्छे संबंध रखने चाहिए। ये दोनों देशों के हित में है। भौगोलिक पड़ोसी और दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश होने के नाते चीन और भारत ना केवल समान चुनौतियों का सामना करते हैं, बल्कि व्यापक सामान्य हित भी साझा करते हैं। ऐसे में भारत को बेहतर रिश्ते के लिए कदम उठाने चाहिए।

भारत के लिए चीन जरूरी!
त्सिंगुआ यूनिवर्सिटी में नेशनल स्ट्रेटेजी इंस्टीट्यूट के रिसर्च डिपार्टमेंट के निदेशक और वरिष्ठ रिसर्च फेलो कियान फेंग के अनुसार, भारत को तरक्की के लिए एक सुरक्षित आंतरिक और बाहरी वातावरण चाहिए। ये नरेंद्र मोदी के न्यू इंडिया विजन के लिए भी जरूरी है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में चीन का अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रभाव भारत को प्रभावित करने वाला एक अहम कारक बन गया है।

चीन-भारत संबंधों के महत्वपूर्ण वैश्विक निहितार्थ हैं। वर्तमान में चीन और भारत जी20 और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय ढांचे के भीतर अपने सहयोग को मजबूत कर रहे हैं। दोनों देश अपने मतभेदों को कम कर सकते हैं तो वे पश्चिमी आधिपत्य का मुकाबला करने वाले संतुलित विश्व व्यवस्था की स्थापना में योगदान देंगे। इससे ग्लोबल साउथ और दुनिया के विकास में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

दोनों देशों में बातचीत जरूरी
ग्लोबल टाइम्स कहता है कि चीन-भारत संबंधों को और अधिक स्थिर बनाने के लिए जरूरी है कि बातचीत बनाए रखें। भारत ने सकारात्मक बयान दिए हैं। हालांकि यह ध्यान रखना अहम है कि भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए गति क्या होगी, यह काफी हद तक भारतीय पक्ष की ईमानदारी पर निर्भर करेगा। उम्मीद की जा सकती है कि भारत मतभेदों के बजाय सहमति पर बढ़कर चीन के साथ संबंधों को आकार देगा।

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