तेल अवीव
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू फिलहाल एक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उन पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों स्तर पर कानूनी मामले चल रहे हैं। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने गुरुवार को नेतन्याहू के खिलाफ गाजा में युद्ध अपराध के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वहीं दूसरी ओर नेतन्याहू को इजरायल में भी भ्रष्टाचार के एक मुकदमे में गवाही देनी है। दोनों ही मामले उनके लिए मुश्किल खड़ी कर रहे हैं।
नेतन्याहू के खिलाफ इजरायल में लंबे समय से भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है। दोषी पाए जाने पर उनके राजनीतिक करियर का खात्मा हो सकता है। आईसीसी के मुकदमे पर नेतन्याहू को देश में समर्थन मिलता दिख रहा है लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में सफाई के बावजूद जनता की राय उन पर बंटी हुई है।
भ्रष्टाचार का मुकदमा बनेगा मुसीबत!
यरूशलम के हिब्रू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर योनातन फ्रीमैन का कहना है कि इजरायल के लोग नाराज हो जाते हैं, जब उन्हें लगता है कि दुनिया उनके खिलाफ है। आईसीसी के फैसले में भी ऐसा ही महसूस किया गया है। इसकी वजह ये है कि इजरायलियों का ध्यान सिर्फ अपने नुकसान पर है। उनको गाजा में अपने बंधकों की फिक्र किसी दूसरी चीज से ज्यादा है। नेतन्याहू को आईसीसी कार्रवाई को लेकर घर में समर्थन मिला है लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में ऐसा नहीं है, जहां उन पर रिश्वतखोरी, विश्वासघात और धोखाधड़ी जैसे आरोप है।
नेतन्याहू के खिलाफ भ्रष्टाचार का यह मुकदमा साल 2020 में शुरू हुआ था। इसमें नेतन्याहू को अगले महीने गवाह के तौर पर बयान दर्ज करना है। वह पिछले साल इस केस में गवाही देने वाले थे लेकिन युद्ध के कारण तारीख आगे बढ़ा दी गई थी। इस बार अदालत ने तरीख आगे नहीं बढ़ाई है। ऐसे में इस मामले में अदालत का फैसला अब जल्दी ही आ सकता है। नेतन्याहू के खिलाफ फैसला आया तो उनके लिए मुश्किल बन सकता है।
आईसीसी वारंट से भविष्य पर संकट!
बेंजामिन नेतन्याहू को घर के बाहर आईसीसी वारंट के चलते मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। इस वारंट का मतलब यह भी है कि अगर वह अदालत के 124 हस्ताक्षरकर्ता देशों में जाते हैं, तो उन्हें गिरफ्तारी भी किया जा सकता है। इनमें से ज्यादातर यूरोप के देश शामिल है। इजरायल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ मेंबर युवल शैनी का कहना है कि नेतन्याहू के खिलाफ वारंट सीधे अर्थों में आगे चलकर इजरायल के लिए अलगाव की वजह बनेगा।
