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रस्ते का माल सस्ते में… चीन से आ रहे घटिया पावर बैंकों पर सरकार की नजर, क्या है मामला?

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नई दिल्ली:

चीन में बने घटिया क्वालिटी के पावर बैंकों की बढ़ती बिक्री ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। सरकार को इनके आयात को रोकने के लिए कदम उठाने पड़ रहे हैं क्योंकि ये देश में प्रतिस्पर्धा को बिगाड़ सकते हैं। साथ ही ये सुरक्षा तथा प्रदर्शन के मानकों पर उपभोक्ताओं को धोखा दे सकते हैं। ऐसे पावर बैंकों की वास्तविक क्षमता दावे से 50-60% कम है। दावा किया जाता है कि यह कम से कम दो बार मोबाइल फोन को चार्ज कर सकता है। लेकिन यह देखने में आया है कि ज्यादातर मामलों में एक बार ही मोबाइल चार्ज करने के बाद इसकी पावर खत्म हो जाती है। कंप्टीशन में आने और बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए भारतीय कंपनियां बहुत कम कीमत पर चीनी सप्लायर्स से ये घटिया लीथियम-आयन सेल खरीद रही हैं।

इस महीने की शुरुआत में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने दो चीनी आपूर्तिकर्ताओं- गुआंगडोंग क्वासुन न्यू एनर्जी टेक्नोलॉजी कंपनी और गंझोउ नोवेल बैटरी टेक्नोलॉजी कंपनी के पंजीकरण रद्द कर दिए थे। भारत में सेल आपूर्ति में इन कंपनियों की आधे से अधिक हिस्सेदारी थी। उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि एक अन्य आपूर्तिकर्ता गंझोउ ताओयुआन न्यू एनर्जी कंपनी लिमिटेड भी BIS के रडार पर है। तीनों कंपनियों से टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं किया जा सका।

ओपन मार्केट से जांच
अधिकारियों ने ओपन मार्केट से इन चीन कंपनियों के पावर बैंकों की जांच की थी। इसमें पाया गया कि अधिकांश पावर बैंक्स की क्षमता उनके दावों की तुलना में बहुत कम थी। इसके बाद ही चीनी कंपनियों पर बैन लगाया गया। एजेंसियों ने पाया कि 10,000 एमएएच बैटरी वाले पावर बैंकों की क्षमता केवल 4000-5000 एमएएच थी। लीथियम-आयन सेल इंडस्ट्री के एक कार्यकारी ने ईटी को बताया कि पावर बैंकों में इस्तेमाल होने वाले घटिया लीथियम सेल बाजार में आ रहे हैं। उपभोक्ता मोबाइल फोन और अन्य उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदते समय सजग रहते हैं लेकिन पावर बैंकों के मामले में ऐसा नहीं है।

एक सूत्र ने कहा कि बीआईएस के पास सुरक्षा के लिए मानक हैं, लेकिन प्रदर्शन के लिए नहीं। चीनी सप्लायर्स सेल के फिजिकल डाइमेंशंस को बनाए रखते हुए बीआईएस मानकों के आसपास काम कर रहे हैं लेकिन ऑर्डर क्वांटिटी की तुलना में कम क्षमता वाला माल भेज रहे हैं। इससे सामग्री की लागत कम हो रही है। वे अच्छे सैंपल बीआईएस को भेज रहे थे जो सभी मानकों को पूरा करते थे। उन्हें ट्रेडमार्क मिलता था लेकिन वे उसी बीआईएस ट्रेडमार्क का उपयोग करके भारत को कम क्षमता वाले घटिया सेल भेज रहे थे। इस तरह कीमत में कम से कम 25% का अंतर होगा।

क्या होगा फायदा
सूत्र ने कहा कि भारत पावर बैंकों में उपयोग के लिए हर महीने चीन से 1.5-2 मिलियन यूनिट लीथियम-आयन सेल आयात करता है। भारत में अभी इसका उत्पादन शुरुआती चरण में है। एक सामान्य 10,000mAh सेल की कीमत लगभग 200-250 रुपये होगी जबकि चीनी सप्लायर उन्हें 150 रुपये प्रति सेल पर बेच रहे थे। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सर्च करने पर पता चला कि स्थापित ब्रांड के 10,000 एमएएच पावर बैंक की कीमत 10,000 रुपये से अधिक है जबकि इसी कैपेसिटी वाले कई ब्रांड्स की कीमत 600 रुपये से कम है। उद्योग को उम्मीद है कि सरकार की कार्रवाई से पावर बैंक की कीमतों में थोड़ी वृद्धि होगी।

एक पावर बैंक कंपनी के एग्जीक्यूटिव ने कहा कि सेल, बैटरी पैक, एनक्लोजर और पीसीबी सहित पावर बैंक की निर्माण लागत इन कंपनियों द्वारा बेची जा रही कीमत से कहीं अधिक है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि अब ये कीमतें बढ़ेंगी और लगभग 1,000 रुपये पर स्थिर होंगी।’ सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन ने पावर बैंक बनाने वाली कंपनियों को चेतावनी देते हुए एक एडवाइजरी जारी की है कि वे कम गुणवत्ता वाले लीथियम-आयन सेल खरीदना बंद करें जो सुरक्षा और प्रदर्शन मानकों को पूरा करने में विफल रहते हैं।

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