अहमदाबाद/राजकोट:
सोशल मीडिया पर चर्चा में भले ही नई पीढ़ी के कथावाचकों सुर्खियों बटोरते हों लेकिन रामकथा के जरिए दान राशि जुटाने के मामले में मुरारी बापू अभी भी बड़ी लकीर खींच रहे हैं। गुजरात के प्रख्यात रामकथाकार मुरारी बापू राजकोट की रामकथा ने 60 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है। यह अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है। पिछले काफी सालों से मुरारी बापू रामकथा से मिलने वाली धनराशि को जन कल्याण और पीड़ितों की मदद में खर्च करते आ रहे हैं। यह तब है जब सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया में बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री और अनिरुद्धाचार्य जी महाराज जैसे नई पीढ़ी के कथाकारों की चकाचौंध है।
किसकी कितनी है फीस?
इंटरनेट पर उपलब्ध ब्योरे के अनुसार कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज एक दिन की भागवत कथा के लिए 1 से 3 लाख रुपये लेते हैं। सात दिनों की भागवत कथा के लिए उनकी फ़ीस 10 से 15 लाख रुपये तक होती है। सोशल मीडिया पर सुर्खियों पर रहने वाले बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री पूरे देश में कथा करते हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो एक दिन की कथा के लिए वो करीब डेढ़ लाख रुपये चार्ज करते हैं। जहां वो कथा करने जाते हैं, वहां लगभग 15 दिनों तक कथा करते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ मोरारी बापू पिछले काफी सालों से रामकथा के लिए कोई भी फीस नहीं ले रहे हैं।
यहां खर्च की जाएगी यह राशि?
रामचरितमानस के व्याख्याता मोरारी बापू की राजकोट में रामकथा ने बुजुर्गों की सेवा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के महान कार्य के लिए 60 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई है। यह राशि सद्भावना ट्रस्ट को दी जाएगी। 78 साल के मुरारी बापू की तरफ से जारी एक बयान में इसकी जानकारी दी गई है। यह रामकथा राजकोट के रेसकोर्स ग्राउंड में हुई थी। रामकथा के पहले दिन मोरारी बापू ने लोगों से बुजुर्गों और प्रकृति के प्रति अपना स्नेह और समर्थन व्यक्त करने की अपील की थी। उनके आह्वान पर भक्तों ने अभूतपूर्व योगदान दिया। जिससे रामकथा के करुणा और मानवता के मूल संदेश को बल मिला। 1 दिसंबर को संपन्न हुई रामकथा ने न केवल हजारों लोगों को आध्यात्मिक शांति प्रदान की।
बन रहा है 1400 कमरों का वृद्धाश्रम
मुरारी बापू की रामकथा में जुटाई गई धनरशि जामनगर रोड पर पडधारी में 300 करोड़ रुपये में बनने वाले वृद्धाश्रम के निर्माण में खर्च होगी। सद्भावना वृद्धाश्रम के इस प्रोजेक्ट में निराश्रित, विकलांग और असहाय बुजुर्ग नागरिकों को रहने की सुविधा मिलेगी। इस वृद्धाश्रम में 1,400 कमरे होंगे। इसका उद्देश्य निवासियों को देखभाल और सम्मान प्रदान करना है। इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर पौधरोपण को भी शामिल किया गया है ताकि पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित हो।
