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गांव से आने पर बैठकें रद्द, एकनाथ शिंदे क्या करेंगे? 3 संभावनाएं, तीसरा सच हुआ तो BJP को झटका लगेगा

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मुंबई

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल करने वाला महायुति गठबंधन अभी तक सरकार नहीं बना पाया है। नतीजे आने के एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद महायुति ने राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है। वहीं कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। वे ठाणे में घर पर आराम कर रहे हैं। उन्होंने पिछले सप्ताह दो दिन का मौन रखा था। इसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी को सत्ता गठन के लिए अधिकतर सुझाव दिए। फिर दिल्ली से लौटने के बाद शिंदे सीधे गांव पहुंचे। वहां रुकने और लौटने के बाद शिंदे ने सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि शिंदे के दिमाग में असल में क्या चल रहा है?

आखिर शिंदे क्या करेंगे, 3 संभावनाएं क्या हैं?
1. उपमुख्यमंत्री के साथ महत्वपूर्ण विभाग
बीजेपी की अगली सरकार में मुख्यमंत्री और एकनाथ शिंदे, अजित पवार उपमुख्यमंत्री हो सकते हैं। शिंदे को बीजेपी की ओर से भी यही ऑफर है। अगर उपमुख्यमंत्री का पद देना है तो शिंदे की मांग है कि गृह विभाग भी दिया जाए। चूंकि गृह विभाग महत्वपूर्ण है, इसलिए शिंदे को इस विभाग के साथ उपमुख्यमंत्री का पद भी मिले तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। जब फडणवीस उपमुख्यमंत्री थे, तब उनके पास गृह विभाग था। वहीं, शिवसेना का तर्क है कि शिंदे को गृह विभाग मिलना चाहिए।

2. खुद की जगह किसी और नेता को डिप्टी सीएम पद
अगर बीजेपी गृह विभाग छोड़ने से इनकार करती है तो शिंदे अपनी जगह किसी और नेता को डिप्टी सीएम बना सकते हैं। इस पद के लिए शिंदे के बेटे श्रीकांत के नाम पर चर्चा चल रही थी। खुद एकनाथ शिंदे ने कल बयान दिया था कि पक्ष-विपक्ष पर चर्चा चल रही है। लेकिन श्रीकांत शिंदे ने कहा कि उन्हें किसी पद की कोई चाहत नहीं है और उपमुख्यमंत्री की खबरों को झूठा बताया है। उपमुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना से दीपक केसरकर के नाम की चर्चा है। इसके अलावा उदय सामंत, गुलाबराव पाटिल, दादा भुसे के नाम भी चर्चा में हैं।

3. सरकार को बाहरी समर्थन
शिंदे ने अपनी मांगों को लेकर अमित शाह को तीन प्रस्ताव दिए। तीसरे विकल्प में बाहरी समर्थन का जिक्र है। अगर विभाग की मांगें पूरी नहीं हुईं तो शिंदे हिंदुत्व के मुद्दे पर सरकार का समर्थन कर सकते हैं। यही प्रस्ताव उन्होंने शाह को दिया है। इसमें सीधे तौर पर दबाव की राजनीति है। अगर शिंदे सरकार से बाहर रहते हैं तो उन्हें उप मुख्यमंत्री पद पर प्रमोट नहीं किया जाएगा। लेकिन इससे शिंदे बीजेपी को परेशानी में डाल सकते हैं। इससे यह संदेश जा सकता है कि बीजेपी ने सहयोगी पार्टी को अपने साथ नहीं लिया और हिंदुत्व वाली पार्टी के साथ सरकार बनाने के बजाय एनसीपी से नाता जोड़ लिया। इससे जनता के मन में बीजेपी की छवि खराब हो सकती है। वहीं शिंदे यह धारणा बनाने की कोशिश कर सकते हैं कि उनके साथ अन्याय हुआ है।

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