रियाद
इस्लामिक देश सऊदी अरब ने फांसी देने के अपने सभी रेकॉर्ड तोड़ दिए हैं। साल 2024 में सऊदी किंगडम में फांसी देने का आंकड़ा दिसम्बर की शुरुआत में 300 को पार कर गया है, जो अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है। मंगलवार 3 दिसम्बर को सऊदी मीडिया ने ड्रग तस्करी और हत्या के दोषी तीन लोगों को फांसी दिए जाने की खबर दी, जिसके बाद इस साल अब तक फांसी दिए जाने की संख्या 303 हो गई है। इस बीच एक भारतीय के ऊपर भी फांसी की तलवार लटक रही है।
सऊदी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल के हफ्तों में देश के अंदर फांसी की सजा में तेजी से उछाल आया है। इसमें अकेले में सितम्बर में 200 लोगों को फांसी दी गई थी। इसमें ड्रग से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराए गए 103 लोग और आतंकवाद के मामले में सजा पाए गए 45 लोग शामिल हैं। 2022 में सऊदी अरब ने ड्रग अपराधियों की फांसी पर तीन साल की रोक को समाप्त कर दिया था, जिसके बाद ड्रग से जुड़े अपराधों के लिए फांसी की सजा में तेजी आई है।
यूपी के शख्स को फांसी की सजा
इस बीच एक नए मामले में सऊदी अरब की एक अदालत ने एक भारतीय को मौत की सजा सुनाई है। उत्तर प्रदेश के मेरठ के रहने वाले शख्स को ड्रग तस्करी का दोषी ठहराया गया है। पीड़ित के परिवार ने उसके लिए क्षमादान की गुहार लगाई है। सऊदी अरब में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने इस संबंध में एक पत्र प्राप्त होने की पुष्टि की है। पत्र में कहा गया है कि मेरठ के रहने वाले जैद जुनैद को मक्का की एक अदालत ने मादक पदार्थ तस्करी के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। उनके परिजनों को दया याचिका दायर करने के विकल्प के बारे में सूचित कर दिया गया है।
एक दशक में सबसे ज्यादा फांसी
सितंबर में मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चेतावनी दी थी कि सऊदी अरब में 196 लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जो एक दशक में सबसे ज़्यादा है। रिपोर्ट में पाया गया कि नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों के लिए फांसी की सजा को मंजूरी ने इस वृद्धि को बढ़ावा दिया। औसतन हर दो दिन में एक फांसी दी गई जबक 2023 में केवल दो फांसी नशीली दवाओं से जुड़े अपराधों के लिए दी गई थी। ऐसा कहा गया है कि प्रतिबंध हटाए जाने से महिलाओं की फांसी की सजा में वृद्धि हुई है।
