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Wednesday, April 22, 2026
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बांग्लादेश में खालिदा ज‍िया की पार्टी संग नया गुल खिलाने की तैयारी में मोहम्मद यूनुस, भारत की बढ़ेगी चिंता

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ढाका

बांग्लादेश में चुनाव कराए जाने की मांग के बीच मोहम्मद यूनुस एक नई सरकार बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। दावा है कि नई सरकार में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को छोड़कर बाकी दलों को शामिल किया जा सकता है। यूनुस का प्लान खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), इस्लामिस्ट जमात-ए-इस्लामी और दूसरी दक्षिणपंथी पार्टियों को मिलाकर सरकार बनाने का है। इस कदम से भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पर खराब असर हो सकता है, जो पहले ही तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। ये भारत के लिए भी चिंता का सबब है क्योंकि बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी का रुख पाकिस्तान से नरमी और भारत विरोधी रहा है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस अवामी लीग को फासीवादी पार्टी बताकर उसे दरकिनार कर रहे हैं। साफ है कि वह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी को सरकार में शामिल नहीं करना चाहते। ऐसे में यूनुस अवामी लीग विरोधी राजनीतिक दलों को शामिल करके एक अंतरिम सरकार बनाने पर विचार कर रहे हैं ताकि फिलहाल चुनाव को टाला जा सके।

शेख हसीना पर हमलावर हैं यूनुस
यूनुस ने लगातार हसीना की पार्टी को किनारे किया है। अक्टूबर में भी एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि हसीना की फासीवादी अवामी लीग के लिए बांग्लादेश की राजनीति में कोई जगह नहीं है। अब एक बार फिर ये सामने आ रहा है कि यूनुस अवामी लीग विरोधी पार्टियों की सरकार बनाने की योजना बना रहे हैं। भारत के लिए इसमें चिंता की बात यह है कि इन दलों के नेताओं का नई दिल्ली के लिए सकारात्मक रुख नहीं रहा है। वहीं पाकिस्तान से इनकी करीबी रही है।

यूनुस के इस प्रयोग की बात ऐसे समय में हो रहा है, जब उन पर राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव कराने का दबाव है। बीएनपी जल्दी से जल्दी बांग्लादेश में चुनाव चाहती है। पार्टी नेताओं को लगता है कि फिलहाल माहौल उनके पक्ष में है। चुनाव में देरी से उसकी लोकप्रियता कम हो सकती है। ऐसें में बीएनपी नेता चुनाव की मांग बार बार कर रहे हैं।

बांग्लादेश में इस साल जून के महीने से ही सियासी उथल पुथल चल रही है। इस साल जून में शेख हसीना सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए थे। प्रदर्शनों के बढ़ने और सेना के कदम खींच लेने के बाद अगस्त में हसीना को आननफानन में ढाका छोड़ना पड़ा था। इसके बाद सेना और हसीना के विरोधी दलों ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाई थी।

 

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