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ट्रंप जो करेंगे सो करेंगे, चीन ने पहले ही दे दिया 3 का झटका, भारत कितना लगा पाएगा मरहम?

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नई दिल्‍ली

चीन ने अमेरिका को झटका दिया है। उसने कुछ खास धातुओं के निर्यात पर रोक लगा दी है। ये धातुएं स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, रडार और सीटी स्कैनर जैसी चीजों में इस्तेमाल होती हैं। चीन ने यह कदम अमेरिका की ओर से चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने के बाद उठाया है। ये कंपनियां एडवांस्ड कंप्यूटर चिप बनाने वाले उपकरण बनाती हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव का यह नतीजा है। चीन का यह कदम नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है। ट्रंप ने चीनी सामानों पर 10% अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की धमकी दी थी। ट्रंप के कार्यभार संभालने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

चीन ने गैलियम, जर्मेनियम और एंटीमनी नाम की तीन खास धातुओं के निर्यात पर रोक लगाई है। गैलियम एल्युमीनियम जैसी मुलायम और चांदी जैसी सफेद धातु होती है। इसका गलनांक कमरे के तापमान से थोड़ा ही ऊपर होता है। जर्मेनियम भूरे-सफेद रंग की धातु होती है जो आसानी से टूट जाती है। एंटीमनी कठोर, ग्रे धातु होती है।

अमेर‍िका के ल‍िए क‍ितनी अहम ये तीनों धातुएं?
ये तीनों धातुएं आज के समय में अमेरिका के तकनीकी और रक्षा उद्योगों के लिए बेहद जरूरी हैं। गैलियम, जर्मेनियम और एंटीमनी कंप्यूटर, रक्षा और अक्षय ऊर्जा तकनीक में जरूरी भूमिका निभाते हैं। इन धातुओं का इस्तेमाल एडवांस्ड सेमीकंडक्टर बनाने में होता है।

चीन इन धातुओं का सबसे बड़ा उत्पादक है। यह इन धातुओं के शोधन में भी आगे है। इन धातुओं का इस्‍तेमाल उपभोक्ता वस्तुओं और सैन्य उद्देश्यों दोनों के लिए किया जाता है। ये धातुएं उन 50 ‘महत्वपूर्ण खनिजों’ में शामिल हैं जिन्हें USGS ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है।

जर्मेनियम सोलर सेल जैसी कम कार्बन वाली तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण है। गैलियम आर्सेनाइड से बने सेमीकंडक्टर वेफर सिलिकॉन की तुलना में ज्‍यादा आवृत्ति पर काम कर सकते हैं। ये गर्मी प्रतिरोधी होते हैं। गैलियम सबसे ऊपर है। इसकी जरूरत हाई-बैंडविथ मेमोरी चिप बनाने के लिए होती है। अमेरिका नहीं चाहता कि चीन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा में इस्तेमाल के लिए इन चिप्स तक पहुंच मिले। इसका इस्तेमाल LED, लेजर और मैग्नेट बनाने में होता है। जर्मेनियम का इस्तेमाल ऑप्टिकल फाइबर और सोलर पैनल में होता है।

जर्मेनियम अलास्का और टेनेसी में जिंक खदानों से निकाला जाता है। अमेरिकी सरकार के पास इसका भंडार है। रक्षा विभाग के पास रीसाइकिलिंग कार्यक्रम है जो नाइट विजन लेंस और टैंक टर्रेट खिड़कियों से जर्मेनियम निकाल सकता है।

चीन ने हीरे और अन्य सिंथेटिक सामग्री जैसी अति-कठोर सामग्री के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाया है। इनका उपयोग कई औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है जैसे कि कटिंग टूल्स, डिस्क ब्रेक और सुरक्षात्मक कोटिंग्स। विशेषज्ञों का कहना है कि अगला प्रतिबंध टंगस्टन, मैग्नीशियम और एल्यूमीनियम मिश्र धातुओं पर लग सकता है।

3 अरब डॉलर से ज्‍यादा के नुकसान की आशंंका
USGS के अध्ययन के अनुसार, गैलियम और जर्मेनियम की सप्‍लाई में व्यवधान से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 3 अरब डॉलर से ज्‍यादा का नुकसान हो सकता है। लेकिन, स्थिति जटिल है। चीन ने जुलाई 2023 में दोनों धातुओं के निर्यात पर लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को लागू किया था। चीनी सीमा शुल्क के आंकड़ों के अनुसार, उसने इस वर्ष अमेरिका को इन धातुओं का निर्यात नहीं किया है। एंटीमनी का निर्यात भी गिर गया है।

चीन ज्‍यादातर महत्वपूर्ण खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन विकल्प भी हैं। जापान भी लगभग अपना सारा गैलियम आयात करता है। यह और बात है कि वह स्क्रैप धातु को रीसाइकिल करके भी इसे निकालता है। चीन 2023 में गैलियम, जर्मेनियम और एंटीमोनी का दुनिया का प्रमुख उत्पादक था। अमेरिका ने 2023 में गैलियम या एंटीमनी का उत्पादन नहीं किया। उसने अलास्का और टेनेसी की खदानों में जर्मेनियम युक्त कुछ जिंक का उत्पादन किया।

भारत नहीं कर पाएगा बहुत मदद
इस मामले में अमेरिका को भारत से भी ज्‍यादा मदद नहीं मिल सकती है। कारण है कि भारत में गैलियम, जर्मेनियम और एंटीमनी का सीमित मात्रा में उत्‍पादन होता है। भारत सरकार इन खनिजों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। इनमें खनन नीतियों में सुधार, नई खोज और प्रौद्योगिकी का विकास शामिल है।

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में बीजिंग के खिलाफ जब से व्यापार युद्ध शुरू किया है, तब से समय के साथ यह बढ़ रहा है। चीन ने अमेरिका की ओर से उन्नत तकनीक तक पहुंच सीमित करने के जवाब में अपेक्षाकृत संयमित और सतर्क दृष्टिकोण अपनाया है। बहुत कुछ भविष्य में दोनों देशों के संबंधों पर निर्भर करता है। यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप कार्यभार संभालने के बाद टैरिफ में तेजी से बढ़ोतरी करने के अपने वादे को पूरा करेंगे या ऐसी घोषणाएं भविष्य की व्यापार वार्ता में शुरुआती चालें हैं। लेकिन, चीन ने दिखाया है कि वह भी चुप बैठने वाला नहीं है।

चीन के ताजा कदम से दुनियाभर के बाजारों में हलचल मच गई है। अमेरिका को अब इन धातुओं के लिए नए स्रोत ढूंढने होंगे। यह देखना होगा कि दोनों देशों के बीच यह व्यापार युद्ध किस ओर जाता है। इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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