मुंबई
महाराष्ट्र में पिछले कई दिनों से चल रहा सत्ता गठन का ड्रामा आखिरकार गुरुवार को मुंबई के आजाद मैदान में मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के बाद खत्म हो गया। इस दौरान कभी अफवाहें आईं कि एकनाथ शिंदे नाखुश हैं। कभी अफवाहें आईं कि वह नाराज होकर अपने गांव चले गए हैं। तो कभी यह भी कहा गया कि वह गृह मंत्री पद के लिए दावेदारी कर रहे हैं। ऐसी भी खबरें थीं कि वह सरकार में शामिल नहीं होंगे। हालांकि इन सबके उलट एकनाथ शिंदे ने उप मुख्यमंत्री का पद संभाल लिया। इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने सहयोगी एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी की है।
फडणवीस ने क्या कहा?
एक इंटरव्यू में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नाराज नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार गठन में देरी का आरोप गलत है। फडणवीस ने कहा कि एकनाथ शिंदे भावुक स्वभाव वाले हैं जबकि उनके दूसरे सहयोगी उपमुख्यमंत्री अजित पवार व्यावहारिक हैं। उन्होंने कहा कि मैं दोनों को संतुलित करता हूं। उन दोनों के साथ मेरा अच्छा रिश्ता बन गया है। फडणवीस ने कहा कि महायुति ने पिछले ढाई साल में बहुत मेहनत की है।
सरकार गठन में कोई देरी नहीं
फडणवीस ने कहा कि सरकार गठन में कोई देरी नहीं हुई। मुझे नहीं लगता कि शिंदे किसी मुद्दे पर नाराज थे। कुछ लोग चाहते थे कि शिंदे समन्वय समिति के अध्यक्ष बनें। लेकिन दिल्ली में हमारी बैठक में शिंदे इस बात पर सहमत हुए कि बीजेपी के पास ज्यादा विधायक हैं। इसलिए मुख्यमंत्री बीजेपी का ही होना चाहिए।
फडणवीस के फैसलों का दबाव
पिछले ढाई साल के कार्यकाल और यहां तक कि पिछले छह महीने में कैबिनेट की एक ही बैठक में कई फैसले जल्दबाजी में लिए गए। हालांकि खबर है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को पहली कैबिनेट बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि गहन चर्चा के बाद ही प्रस्ताव कैबिनेट के सामने लाए जाएं।
वित्तीय अनुशासन का पालन करने को कहा
इसके अलावा उन्होंने वित्तीय अनुशासन का पालन करने का भी संदेश दिया है। शपथ ग्रहण समारोह के बाद गुरुवार को मंत्रालय में पहली कैबिनेट बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे, अजित पवार समेत प्रशासन के सभी प्रमुख प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान फडणवीस ने निर्देश दिये।
