नई दिल्ली,
सीरिया में इस्लामिक समूह हयात तहरीर अल शाम (HTS) के नेतृत्व में राष्ट्रपति बशर अल-असद का तख्तापलट भारत के लिए भी एक झटके के तौर पर देखा जा रहा है. असद के परिवार के साथ भारत के रिश्ते हमेशा अच्छे रहे और सीरिया ने हर बड़े मुद्दे पर भारत का समर्थन किया था, खासकर कश्मीर के मामले में. ऐसे वक्त में जब बहुत से इस्लामिक देश कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़े थे, सीरिया उन कुछेक देशों में शामिल था जो पाकिस्तान से अलग खड़े होकर भारत की संप्रभुता के लिए अपना समर्थन जताता था.
असद के नेतृत्व वाली सीरियाई सरकार कहती रही है कि कश्मीर विवाद भारत का अंदरूनी मामला है और नई दिल्ली को इसे अपने तरीके से हल करने का अधिकार है. 2016 में सीरिया ने कश्मीर विवाद पर कहा था कि भारत को कश्मीर मुद्दे को ‘किसी भी तरीके से’ और ‘बिना किसी बाहरी मदद के’ हल करने का अधिकार है.कश्मीर पर सीरिया का यह रुख इस्लामिक देशों के संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के बहुत से देशों से अलग है जिन्होंने अक्सर इसके उलट रुख अपनाया है और पाकिस्तान के एजेंडे का शिकार हुए हैं.
अनुच्छेद 370 पर भी सीरियाई सरकार ने किया था भारत का समर्थन
भारत ने 2019 में जब अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू और कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था तब सीरियाई सरकार ने इसे भारत का ‘अंदरूनी मामला’ बताया था.उस वक्त नई दिल्ली में सीरिया के राजदूत रियाद अब्बास ने कहा था, ‘हर सरकार को अपने लोगों की रक्षा के लिए अपनी जमीन पर जो चाहे करने का अधिकार है. हम किसी भी कार्रवाई में हमेशा भारत के साथ हैं.’
