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Wednesday, April 22, 2026
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सीरिया के बाद अब इजरायल के मुस्लिम दोस्‍त देश का नंबर? ईरानी हमले में बन गया था ढाल, यहूदी देश की करी थी रक्षा

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अम्मान

सीरिया के बाद जॉर्डन के नेताओं को डर है कि उनका देश इसी तरह के तख्तापलट का शिकार हो सकता है। यह डर की वजह ये है कि 1.15 करोड़ की आबादी वाले जॉर्डन में करीब 60 फीसदी फिलिस्तीनी हैं और 13 लाख सीरियाई शरणार्थी हैं। इनमें से कुछ पर सीरियाई सरकार के लिए जासूसी करने का शक है, जिन पर गुप्त निगरानी रखी जा रही है। वहीं घरेलू इस्लामिक आंदोलन के लोग भी अपनी नाराजगी दिखाते रहे हैं और ईरान ने भी गुस्सा दिखाया है। इजरायली वेबसाइट वायनेट ने अपनी रिपोर्ट में ये दावा किया है। पश्चिम एशिया में जॉर्डन को इजरायल का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है।

वायनेट की रिपोर्ट कहती है कि फिलिस्तीनी और सीरियाई लोगों के अलावा दस लाख इराकी शरणार्थियों ने भी जॉर्डन की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बढ़ाई है। जॉर्डन के लिए घरेलू के साथ-साथ दूसरे देशों से संबंध भी चुनौती बन सकते हैं। जॉर्डन और सीरिया के रिश्तों में असद के समय कड़वाहट देखी गई थी। ईरान भी इजरायल को मदद करने की वजह से जॉर्डन से नाखुश हैं। इसने जॉर्डन की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।

सीरिया से आवाजाही पर बढ़ी निगरानी
सीरियाई शहर दरआ स्थित जॉर्डन का जबेर बॉर्डर क्रॉसिंग को दमिश्क में उथलपुथल के बाद बंद कर दिया गया है। जॉर्डन के गृह मंत्री माजिन अल फर्रेह ने कहा है कि केवल ट्रक और सीरिया से आने वाले जॉर्डन के नागरिकों को ही सीमा पार करने की अनुमति दी जाएगी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां जॉर्डन पर कड़ी नजर रख रही हैं। जॉर्डन के राजा, उनकी खुफिया और सैन्य संस्थाएं इस्लामिक आंदोलन के सदस्यों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। इस आंदोलन के जॉर्डन की संसद में 16 प्रतिनिधि हैं।

जॉर्डन के लिए एक चिंता यह भी है कि सीरिया की नई सरकार स्थिर होने के बाद जॉर्डन के विद्रोही गुटों से हाथ मिला सकती है। जॉर्डन सूत्रों ने चेतावनी दी है कि सीरिया के नए नेतृत्व के इरादे अस्पष्ट हैं और उन पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है। तुर्की और राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन की तैयारियों पर भी जॉर्डन की नजर है। इस बीच सीरिया के कुर्द विद्रोही तुर्की के निशाने पर हैं और ईरान भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है।

जॉर्डन के सामने कई चुनौतियां
एक्सपर्ट का कहना है कि सीरियाई और इराकी शरणार्थी, ईरान का खतरा, सीरिया की नई सरकार के इरादे, तुर्की की भूमिका और आंतरिक इस्लामिक आंदोलन, ये सभी जॉर्डन के लिए चुनौती हैं। इससे जॉर्डन की सरकार के लिए आने वाला समय कठिन हो सकता है। ऐसे में फिलहाल उनको ज्यादा सतर्कता की जरूरत है।

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