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Wednesday, April 22, 2026
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सीरिया में अब अमेरिका बनाम तुर्की की जंग, एर्दोगन को मनाने जा रहे ब्लिंकन, क्या टूट गया पश्चिमी प्रभुत्व?

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दमिश्क

सीरिया में बशर अल-असद सरकार के पतन के बाद एक नई जंग शुरू हो गई है। इसमें एक पक्ष विद्रोहियों का समर्थन तुर्की है तो वहीं दूसरा पक्ष उनके खिलाफ लड़ाई करने वाले सीरियन डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF) का समर्थन कर रहा अमेरिका है। ऐसे में अब सीरिया में अमेरिका और तुर्की के बीच एक अघोषित युद्ध छिड़ गया है। एक तरफ जहां तुर्की सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज पर हमले में सहायता कर रहा है, वहीं अमेरिका सीरियाई विद्रोहियों के खिलाफ हमले में मदद कर रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के दौरान तुर्की के अधिकारियों ने घोषणा की है कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन शुक्रवार को अंकारा का दौरा करेंगे।

तुर्की पहुंच रहे अमेरिकी विदेश मंत्री
अमेरिकी विदेश विभाग के एक बयान में संकेत दिया गया है कि ब्लिंकन यह सुनिश्चित करने के महत्व पर चर्चा करेंगे कि संक्रमण प्रक्रिया और सीरिया में एक नई सरकार का गठन अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करे और सीरिया को आतंकवाद के आधार के रूप में इस्तेमाल होने से रोके। सीरिया में अमेरिका, रूस, तुर्की, इजरायल और ईरान अपने-अपने हितों को साधने के लिए एक दूसरे के खिलाफ काम कर रहे हैं। सबका यही दावा है कि उनकी भागीदारी सीरिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए है, लेकिन उनके हमलों में अनगिनत सीरियाई लोगों की मौतें हो रही है।

सीरियाई विद्रोहियों की सफलता से अमेरिका परेशान
सीरिया में विद्रोही गुट हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के नेतृत्व में गठबंधन बलों ने बशर अल-असद को सत्ता से बेदखल कर दिया। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि सीरिया पर विद्रोही गुट इतनी तेजी से कब्जा कर लेंगे। विद्रोहियों की इस तेजी ने अमेरिका तक को चौंका दिया। इन विद्रोही गुटों के गठबंधन ने मात्र 11 दिनों में सीरिया की राजधानी दमिश्क पर कब्जा कर लिया और राष्ट्रपति बशर अल-असद को देश छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया।

तुर्की से नाराज है अमेरिका
रिपोर्टों से पता चलता है कि अमेरिकी अधिकारी असद के साथ एक समझौते पर बातचीत करने का प्रयास कर रहे थे, जो हिजबुल्लाह और ईरान के साथ संबंधों को तोड़ने के बदले में उनकी स्थिति को सामान्य कर देता। अमेरिका ने तुर्की समर्थित सीरियन नेशनल आर्मी (SNA) द्वारा अपने सहयोगी बल एसडीएफ को निशाना बनाकर किए गए अभियानों पर चिंता व्यक्त की है। बड़ी बात यह है कि अमेरिका और तुर्की नाटो सदस्य देश हैं, जिनके सैन्य संबंध काफी मजबूत माने जाते हैं।

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