नई दिल्ली
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने संविधान पर चर्चा के दौरान अपनी बात की शुरुआत हिलाल फरीद की नज्म से की। इस दौरान उन्होंने केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी पर जमकर अटैक किए। उन्होंने कहा कि बीते 10 साल में बड़ी संख्या में लोग ये मानते हैं कि संविधान खतरे में हैं। केंद्र सरकार संविधान से छेड़छाड़ करना चाहती है। उन्होंने इस दौरान खुद पर हुए अटैक का भी मुद्दा उठाया।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि मुझ पर भी कई हमले हुए जिसके चलते मुझे सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा। यही संविधान की ताकत है। इस दौरान उन्होंने ऐसा मुद्दा भी उठा दिया जिस पर सत्तापक्ष से निशिकांत दुबे और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू सामने आए। यही नहीं आरोप-प्रत्यारोप का दौर इतना बढ़ गया कि लोकसभा की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।
हिलाल फरीद की नज्म से की शुरुआत
महुआ मोइत्रा ने अपनी बात की शुरूआत जिस नज्म से की वो इस प्रकार है। उन्होंने कहा, ‘मुबारक घड़ी है, कल सज धज कर, मेक अप रच कर, खूब जंच कर देखो उसका मंच पर आना। किताब संविधान की आंखों से लगाना और फरमाना मैं शीश को झूकाकर, इस किताब को मन में बसाकर, ईश्वर की शपथ लेता हूं। रात ढलने दीजिए, दिन बदलने दीजिए, कल तलक ये बेवफा सितमगरों का बादशाह सब भूल जाएगा। नफरतें उगाएगा। दूरियां बढ़ाएगा। रोज संविधान की धज्जियां उड़ाएगा। मगर जो आज महफिल सजी है, यही मानती है कि हीरो वही है। मुबारक घड़ी है।’
महुआ मोइत्रा का बीजेपी पर सीधा अटैक
तृणमूल सांसद ने आगे कहा कि इस तरह बीते 10 साल में बड़ी संख्या में लोग ये मानते हैं कि संविधान खतरे में हैं। इस सरकार ने इंदिरा गांधी के इमरजेंसी पर सवाल उठाए। हां वो लोकतंत्र का काला अध्याय है। लेकिन मौजूदा सरकार ऐसा इनडायरेक्ट तरीके से कर रही है। पुलिस वोटर्स को धमका रही। ऐसा रामपुर, संभल में नजर आया, जहां वोटर्स पर घर पर रहने का दबाव बनाया गया। अल्पसंख्यकों को टारगेट किया गया।
बुलडोजर जस्टिस, नेमप्लेट विवाद का किया जिक्र
महुआ मोइत्रा ने आगे कहा कि ये सरकार सिटिजन अमेंडमेंट एक्ट लाई, जो सीधे तौर पर फंडामेंटल राइट्स पर सवाल खड़े करता है। सभी बीजेपी शासित राज्यों में बुलडोजर जस्टिस के नाम पर घरों पर कार्रवाई हुई। कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करते हुए अल्पसंख्यकों के घरों को गिराया गया। यूपी सरकार का वो फैसला जिसमें खाने-पीने की दुकान लगाने वाले अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिमों को अपनी शॉप के आगे नेमप्लेट लगाने का फैसला सवाल खड़े करने वाला था।
जज लोया का जिक्र किया और सदन में मचा हंगामा
टीएमसी सांसद ने आगे कहा कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट गया जहां से इस फैसले पर रोक लगी। यूपी सरकार का ये आदेश साफ तौर आर्टिकल 15 का उल्लंघन करता है। इस दौरान जस्टिस लोया का मुद्दा उठाने को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। निशिकांत दुबे और किरेन रिजिजू ने विपक्ष की ओर से उठाए गए मुद्दे पर कहा कि इस पर कार्रवाई होगी। इस मुद्दे को लेकर संसद में काफी हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।
