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तालिबान का काल बनते ISKP के आतंकी, अलकायदा का दोबारा गढ़ बन रहा अफगानिस्‍तान, हक्‍कानी की हत्‍या से तनाव

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काबुल

अमेरिकी सेना ने साल 2021 में जब अफगानिस्तान को छोड़ा था, उस समय आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट की अफगान शाखा ISKP बेहद कमजोर हो चुकी थी। लेकिन अगस्त 2021 में काबुल की सत्ता पर तालिबान की वापसी के बाद यह आतंकवादी संगठन लगातार ताकतवर होता जा रहा है। इसी सप्ताह ISKP ने काबुल में बड़ा हमला किया, जिसमें तालिबान सरकार में शरणार्थी मामलों के मंत्री और हक्कानी नेटवर्क के खलील हक्कानी की मौत हो गई। वे अफगानिस्तान की तालिबान सरकार में गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी के चाचा और हक्कानी नेटवर्क के संस्थापक जलालुद्दीन हक्कानी के भाई थे।

अफगानिस्तान में मजबूत हो रहा ISKP
खलील हक्कानी की हत्या हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में आईएसकेपी के हमले में होने वाले तालिबान के किसी सबसे बड़े नेता की मौत है। इसके साथ ही आईएस ने एक बार दिखाया है कि वह न केवल ताकतवर हुआ है, बल्कि राजधानी काबुल के अंदर तालिबान के बड़े नेताओं की हत्या करने की क्षमता रखता है।

जून 2023 में संयुक्त राष्ट्र की जारी एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के बाद से आईएसकेपी और अल-कायदा जैसे आतंकी सगंठन लगातार मजबूत हो रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि आईएसकेपी ने अफगानिस्तान के दूरदराज इलाके में तालिबान की कमजोरी का फायदा उठाया है। आईएसकेपी ने तालिबान अधिकारियों पर हमले बढ़ाने में कामबायी हासिल की है।

अलकायदा और तालिबान फिर साथ
इस बीच ऐसे संकेत हैं कि तालिबान का पुराना सहयोगी अलकायदा एक बार फिर से अफगानिस्तान में सक्रिय हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि अलकायदा ने कुनार और नूरिस्तान जैसे इलाकों में अपने ट्रेनिंग कैंप शुरू किए हैं। अलकायदा के साथ तालिबान का रिश्ता खत्म नहीं हुआ है, बल्कि इसके सदस्य वास्तव में तालिबान शासन के सदस्य के रूप में ही काम कर रहे हैं।

पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तालिबान शासन अलकायदा के कमांडरों और सदस्यों के हथियार से लेकर रहने तक और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों तक उनकी जरूरत की हर चीज उपलब्ध कराता है। अलकायदा के सदस्य तालिबान शासन के अंदर होने वाले अफीम के साम्राज्य के विशाल ड्रग तस्करी नेटवर्क में भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। यमन, लीबिया और सोमालिया के साथ फिलिस्तानी आतंकवादी भी अफगानिस्तान के अंदर अल-कायदा के शिविरों में प्रशिक्षण लेते हैं।

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