नई दिल्ली:
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने शुक्रवार को लोकसभा में संविधान पर चल रही बहस के दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए। उन्होंने कुछ जजों पर अदालतों की गरिमा को कम करने का आरोप लगाया। मोइत्रा ने अयोध्या मंदिर फैसले पर पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की ‘भगवान से प्रार्थना की’ टिप्पणी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कभी नहीं सोचा होगा कि जज तर्क और ज्ञान के बजाय फैसला सुनाने के लिए भगवान के साथ निजी बातचीत पर भरोसा करेंगे।
राम जन्मभूमि विवाद को लेकर चंद्रचूड़ ने कही थी ये बात
पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने अक्टूबर में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से निपटने के अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा किया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने इस मामले के समाधान के लिए भगवान से प्रार्थना की थी। अपने पैतृक गांव कन्हेरसर में एक सम्मान समारोह के दौरान, पूर्व सीजेआई ने खुलासा किया कि उन्होंने इस जटिल मामले का समाधान ढूंढने के लिए दैवीय हस्तक्षेप की मांग की थी। यह मामला उनके सामने तीन महीने तक रहा था।
‘भगवान हमेशा एक रास्ता खोज देंगे’
चंद्रचूड़ ने कहा था, ‘अक्सर हमारे पास मामले (फैसले करने के लिए) होते हैं लेकिन हम किसी समाधान पर नहीं पहुंचते। अयोध्या (राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद) के दौरान भी कुछ ऐसा ही हुआ जो तीन महीने तक मेरे सामने था। मैं भगवान के सामने बैठ गया और उनसे कहा कि उन्हें एक समाधान खोजना होगा।’ उन्होंने कहा, “‘मेरा विश्वास करो, अगर आपमें आस्था है, तो भगवान हमेशा एक रास्ता खोज लेंगे।’
मोइत्रा के भाषण के बाद सदन में हंगामा
महुआ के भाषण के तुरंत बाद सदन को आधे घंटे के लिए शाम 5 बजे तक स्थगित कर दिया गया। सत्तारूढ़ बीजेपी ने उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई और स्पीकर से उन्हें हटाने की मांग की, जिससे हंगामा मच गया। बीजेपी ने मोइत्रा की टिप्पणी को अनुचित बताया। उन्होंने स्पीकर से मांग की कि मोइत्रा की टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाया जाए। इसी वजह से सदन में हंगामा हो गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।
