नई दिल्ली
विपक्षी गठबंधन इंडिया में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। हाल ही में हुए कई घटनाक्रम इस बात का संकेत देते हैं कि कांग्रेस के साथी दल कुछ मुद्दों पर अलग रुख अपना रहे हैं। पहले इंडिया गठबंधन के अध्यक्ष पद को लेकर विपक्षी दलों में खींचतान चल रही थी, तो अब ईवीएम के मुद्दे पर भी विपक्षी नेता कांग्रेस से अलग-थलग दिख रहे हैं। इससे पहले अडानी के मुद्दे पर भी इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों ने कांग्रेस के रुख से किनारा किया था।
क्या है हालिया मामला?
सोमवार को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने ईवीएम के मुद्दे पर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईवीएम पर सवाल उठाने वालों को इलेक्शन कमीशन के पास जाना चाहिए और डेमो कर बताना चाहिए कि किस टेक्निक से वोटिंग मशीन को हैक किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप नहीं लगाए जा सकते क्योंकि वोटिंग के दौरान बूथ पर मॉक पोल और काउंटिंग के दौरान इसकी चेकिंग की जाती है। उन्होंने बिना नाम लिए कांग्रेस पर घेरते हुए कहा कि केवल बयानबाजी ही हो रही है, और कुछ नहीं हो रहा।
उमर अब्दुल्ला के भी बदले सुर
अभिषेक बनर्जी से पहले जम्मू-कश्मीर के सीएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने भी ईवीएम के मुद्दे पर कांग्रेस से अलग बयान दिया था। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब आप चुनाव जीतें तो नतीजे स्वीकार कर लें और जब हार जायें तो ईवीएम की गलती बता दें। उन्होंने कहा, ‘जब आपके पास संसद में 100 से ज्यादा सदस्य ईवीएम से जीतकर आए हों, तो इसे आप जीत मानते हैं। कुछ महीनों बाद आप इससे पलट कैसे सकते हैं… हमें ये ईवीएम पसंद नहीं हैं क्योंकि अब चुनाव रिजल्ट वैसे नहीं आ रहे हैं जैसा हम चाहते हैं।
अडानी मुद्दे पर भी साथी दलों ने किया था किनारा
कांग्रेस लगातार अडानी के मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेर रही है। सड़क से लेकर संसद तक कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी करती दिख रही है। शीतकालीन सत्र में ऐसा एक भी दिन नहीं था, जब कांग्रेस ने इस मुद्दे पर हंगामा ना किया हो। लेकिन कांग्रेस के सहयोगी दलों ने इस मुद्दे पर भी कांग्रेस से किनारा कर लिया है। अडानी मुद्दे पर संसद की कार्यवाही बाधित करने को टीएमसी, समाजवादी पार्टी और शरद पवार की एनसीपी ने भी मोदी सरकार को निशाना बनाने के कांग्रेस के स्टैंड से खुद को पीछे कर लिया है ।
दिल्ली चुनाव के लिए AAP से नहीं बनी बात
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए भी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन नहीं हो पाया। आखिरी वक्त तक गठबंधन की चर्चाएं जरूर हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन की बैठक भी हुई लेकिन सीट शेयरिंग पर बात ना बन पाई। वहीं आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने दो-दो बार कांग्रेस से गठबंधन की अटकलों को खारिज किया। कहा ये भी जा रहा है कि दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस इकाई और केंद्रीय नेतृत्व के बीच भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। कांग्रेस की न्याय यात्रा के समापन में राहुल गांधी समेत कोई भी शीर्ष नेतृत्व शामिल नहीं हुआ था।
सहयोगी दलों को नहीं भा रहा कांग्रेस का नेतृत्व!
लोकसभा चुनाव में हार के बाद से ही विपक्षी गठबंधन इंडिया में दरार पड़ती नजर आ रही है। इसके बाद महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के नतीजों ने गठबंधन को और कमजोर कर दिया। सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के सामने है। चुनावी विश्लेषक कांग्रेस नेतृत्व को इसका जिम्मेदार मान रहे हैं। इसी का नतीजा है कि अब इंडिया गठबंधन के अध्यक्ष को लेकर विपक्षी नेता खुलकर सामने आ रहे हैं। बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने खुद इंडिया गठबंधन की अगुआई करने की इच्छा जताई है। समाजवादी पार्टी, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) ने इस मुद्दे पर ममता बनर्जी का समर्थन किया है। इसके अलावा आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने भी समर्थन किया। ऐसे में अब ममता बनर्जी की ताशपोशी की सुगबुगाहट बढ़ गई है।
